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Gorakhpur News: गोली-बोली से हथिया लेते थे जमीन...जानिए, अब किस डर से खोज रहे ठौर-ठिकाना

Wed, 06 Mar 2024 12:04 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

गोरखपुर के माफिया राकेश, अजीत और कमलेश अब बचने के लिए रसूखवालों का शरण खोज रहे हैं। पुलिस ने एक बार जिले के टॉप 10 में शामिल अपराधियों पर सख्ती शुरू कर दी है। कुछ दिन पहले एसटीएफ के एनकाउंटर में माफिया विनोद उपाध्याय मारा गया था।
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गोरखपुर एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर। समय सबका हिसाब रखता है। कभी गोली और दबंगई के बल पर वे किसी की भी जमीन हथिया लेते थे। सत्ता और व्यवस्था के दमखम से दूसरे की संपत्तियों छीन लेते थे। हालात बदले तो लंबे समय अंडरग्राउंड रहकर माफिया ने धंधे चलाए। उस पर भी सख्ती शुरू हुई तो जेलों में दुबके या फिर शहर छोड़कर नेपाल-बिहार में जा छिपे।

अब चुनावी समर से पहले पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने इन माफिया की खैर-खबर लेनी शुरू की तो पता लगा कि कोई रसूखदारों के सहारे तो कोई उनके विरोधियों की अंगुली पकड़कर अपनी नैया पार लगाने की जुगत में है।
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जिले के टॉप टेन बदमाशों की सूची में शामिल माफिया अजीत शाही, सुधीर सिंह हों या फिर सीलिंग की जमीन बेचकर अचूक संपत्ति खड़ा करने वाला कमलेश यादव, दीनानाथ, पुलिस-प्रशासन की सख्ती की वजह से सभी शहर छोड़कर फरार हैं।

पुलिस-प्रशासन की सख्ती के बीच इन सभी में से किसी का भी नए अपराध में नाम नहीं आया है। इस बीच माफिया राकेश का नाम आया तो वह भी उस महिला को हड़काने के लिए, जिसने उस पर केस दर्ज कराया है।

माफिया अजीत शाही। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
अजीत शाही जमानत पर...शहर से बाहर ढूंढ रहा शरणदाता
कोऑपरेटिव बैंक में जाकर धमकी देने के मामले में माफिया अजीत शाही का नाम लंबे समय बाद 12 मई 2023 को सामने आया था। इस मामले में शाहपुर थाने में केस दर्ज किया गया। पुलिस ने जांच शुरू की तो परतें खुलने लगीं। पता चला कि सपा-बसपा से जुड़ा रहा अजीत शाही नाम बदलकर अजीत वीर विक्रम सिंह बनकर खुद को शरीफ दिखाता था।

फिर इस मामले में भी गीडा थाने में केस दर्ज किया गया और माफिया की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने दबिश देनी शुरू की तो वह पुलिस को चकमा देकर कोर्ट में हाजिर हो गया। अब अजीत शाही जमानत पर रिहा है। कैंट पुलिस की मानें तो उसके घर पर सत्यापन के दौरान यही पता चलता है कि अब वह बाहर रहता है।

उसकी अवैध कमाई से अर्जित की गई संपत्ति पर बुलडोजर भी चल चुका है और खाली कराई जमीन पर नगर निगम पेट्रोल पंप खोलने की तैयारी में है। बताया तो यह भी जाता है कि वह एक ऐसे मजबूत शख्स के शरण में जाने की जुगत में है, जिससे उसे पुलिस प्रशासन से राहत मिल जाए। उधर, पुलिस उसके मामलों में सजा कराने की पैरवी कोर्ट में कर रही है।

भू माफिया कमलेश यादव की संपत्ति को जब्त करती पुलिस व प्रशासन की टीम। - फोटो : अमर उजाला।
जालसाज कमलेश ने शहर छोड़ा...बाराबंकी की संपत्ति होनी है जब्त
सीलिंग की जमीन बेचकर आईटीआई कॉलेज का मालिक बने जालसाज कमलेश यादव, मैरिज हाउस का मालिक दीनानाथ ने कई लोगों से ठगी की। जमानत पाने के बाद कमलेश यादव फरार है। बताया जा रहा है कि वह झारखंड में छिपा है, अब गलती से भी गोरखपुर नहीं आना चाह रहा है।

कोर्ट में चल रहे केस की पैरवी कराता है, लेकिन पुलिस कई मामलों में उसकी तलाश कर रही है। दीनानाथ के मैरिज हाउस पर बुलडोजर चला तो आईटीआई कॉलेज को खाली कराकर जब्त कर लिया गया। दोनों की कीमती जमीन, मकान सब को गैंगस्टर के तहत जब्त कर लिया गया।

इन दोनों ने मिलकर बिहार और गोरखपुर के कई लोगों को सीलिंग की जमीन बेची है। अब इनके बाराबंकी में बन रहे होटल की जानकारी मिली है। गैंगस्टर एक्ट के तहत गोरखपुर पुलिस ने उसे भी जब्त करने के लिए पत्राचार किया है, लेकिन तीन महीने बीते जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो सकी है। पुलिस की ओर से लगातार रिमाइंडर भेजा रहा है, ताकि आरोपियों पर कार्रवाई हो सके।

माफिया विनोद उपाध्याय( फाइल फोटो) - फोटो : फाइल फोटो

माफिया विनोद ढेर...उसके भाई संजय की तलाश रहे संपत्ति
दूसरे की जमीन पर कब्जा करके अपना बताने वाला माफिया विनोद उपाध्याय का कारनामा भी सामने आया तो पुलिस ने एक-एक कर कई केस दर्ज किए। बसपा के टिकट पर शहर से विधायकी का चुनाव लड़ चुका फरार विनोद चुनावी जोड़तोड़ में लगा था कि मुठभेड़ में मारा गया।

पता चला कि उसके इस काम में उसका भाई संजय उपाध्याय भी उतना ही हिस्सेदार है, जितना खुद विनोद उपाध्याय। इसके बाद पुलिस ने कुंडली खंगाली और रंगदारी, कब्जा करने सहित कई केस दर्ज किए। गैंगस्टर की कार्रवाई हुई, इनाम घोषित हुआ तो संजय तो पुलिस को चकमा देकर कोर्ट में हाजिर हो गया, लेकिन विनोद उपाध्याय पुलिस को चकमा देकर भागता रहा।

एक लाख रुपये तक का इनामी होने के बाद उसे एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया। विनोद के अंत के साथ ही अपराध में पनप रहे लोगों ने गोरखपुर से दूरी भी बना ली। लेकिन, उसके भाई संजय के शाहपुर थाने के पास की संपत्ति अब भी बच गई है।

इसे लेकर पुलिस की ओर से राजस्व विभाग से पत्राचार किया गया है, ताकि उस संपत्ति के बारे में सही जानकारी मिले और फिर गैंगस्टर एक्ट के तहत उस पर भी कार्रवाई की जा सके। फिलहाल, अभी संजय की इस संपत्ति के बारे में सटीक जानकारी नहीं मिल पाने की वजह से पुलिस ने कार्रवाई को आगे नहीं बढ़ाया है।

माफिया सुधीर सिंह। - फोटो : अमर उजाला।
आजमगढ़ जेल में सुधीर...शरण पाने को बेताब है
जमीन कब्जाने के आरोपों से घिरा माफिया सुधीर सिंह वर्तमान में आजमगढ़ जेल में बंद है। सहजनवा विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके सुधीर की करोड़ों की संपत्ति पर पुलिस-प्रशासन कार्रवाई कर चुकी है। गैंगस्टर एक्ट के तहत सभी संपत्तियां जब्त हो चुकी हैं, कुछ और टारगेट पर हैं, जिसका लेखा-जोखा भी तैयार कर लिया गया, लेकिन इसी बीच सुधीर किसी के शरण में पहुंचने में कामयाब हो गया।

हालांकि, प्रशासन ने अभी कार्रवाई बंद नहीं की है। वह जिन संपत्तियों को पैतृक बताया था, उसका ब्योरा नए सिरे से जुटाया जा रहा है। खबर है कि इसपर जल्द ही कार्रवाई भी संभव है। माफिया सुधीर सिंह किसी ऐसे ताकतवर की शरण में जाने को बेताब है, ताकि उसे अभयदान मिल सके।
लेकिन फिलहाल ऐसा होता संभव नहीं दिख रहा है। पुलिस उसके केस की लगातार कोर्ट में पैरवी करा रही है। बाहर से आकर भी कई दरोगा, सिपाही इसके खिलाफ बयान दर्ज करा चुके हैं।
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माफिया राकेश यादव। - फोटो : अमर उजाला।
जेल में है राकेश यादव....गुर्गे पर तीन दिन पहले दर्ज हुआ धमकाने का केस
माफिया राकेश यादव भी दूसरों की जमीन पर कब्जा करके उसे अपना बना लेता था या फिर जमीन मालिक को इस कदर मजबूर कर देता था कि वह औने-पौने दाम में अपनी जमीन बेचने को मजबूर हो जाए। पुलिस ने टॉप टेन बदमाशों पर जब अभियान चलाना शुरू किया तो इसकी भी कलई खुलकर सामने आ गई।

बसपा से जुड़े रहे राकेश के गुलरिहा इलाके में अवैध तरीके से बने मकान पर प्रशासन का बुलडोजर चल गया। वर्तमान में राकेश यादव मऊ जेल में बंद है, लेकिन उसके गुर्गे पर तीन दिन पहले ही एक महिला और उसकी बेटी को धमकाने का केस दर्ज किया गया। बताया जा रहा है कि जमानत पर बाहर आया गुर्गा जमीन कब्जा करने का केस दर्ज कराने वाली महिला को केस वापसी के लिए धमका रहा था।

कोर्ट परिसर में इस तरह की घटना होने के बाद कैंट पुलिस ने तत्काल आरोपी पर केस दर्ज कर लिया और उसकी तलाश में जुटी है, लेकिन वर्तमान में उसका साथी सुधीर साहनी फरार है। राकेश के खिलाफ भी तीन केस में पुलिस ने कोर्ट में साक्ष्यों के साथ पैरवी तेज कर दी है।

एसएसपी गौरव ग्रोवर ने बताया कि सरकार की मंशा के अनुरूप आम लोगों को परेशान करने वाले जिन भी माफिया का नाम सामने आया है, पुलिस सभी पर केस दर्ज कर कार्रवाई की है। सभी पर गैंगस्टर का केस दर्ज कर उनके अपराध से अर्जित की गई संपत्ति को जब्त किया गया। कइयों पर बुलडोजर भी चला। टॉप टेन बदमाशों के कोर्ट में ट्रायल पर चल रहे केस में पुलिस साक्ष्यों के साथ पैरवी कर रही है, ताकि उन्हें कोर्ट से सजा दिलाई जा सके।
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