गोरखपुर। उपकेंद्र मुंडेरा बाजार के लिए बनाई गई 33 केवीए लाइन की चोरी का मामला 20 दिन बाद भी अनसुलझा बना हुआ है। सात मार्च को गठित दो सदस्यीय जांच टीम अब तक ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी है।
टीम में गुलरिहा और कैंपियरगंज के अधिशासी अभियंता राजवीर सिंह व संजय कुमार को शामिल किया गया था लेकिन अब तक लाइन निर्माण से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी एकत्र नहीं हो सके हैं। बताया जा रहा है कि मुंडेरा उपकेंद्र को वैकल्पिक सप्लाई देने के लिए शत्रुघ्नपुर बिजली घर से 33 केवीए लाइन बिछाई गई थी।
विभागीय दावों के मुताबिक, 28 फरवरी से पांच मार्च के बीच यह लाइन चोरी हो गई। खास बात यह है कि जिस खेत से होकर लाइन गुजर रही थी, वहां उस समय फसल खड़ी थी। बिना फसल को नुकसान पहुंचाए लाइन चोरी होना ग्रामीणों के लिए भी हैरानी का विषय बना हुआ है। हालांकि जांच अधिकारियों का दावा है कि फसल कटने के बाद ही लाइन चोरी हुई है, जिसके फोटो और वीडियो भी उनके पास हैं। वहीं इस पूरे घटनाक्रम ने विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राथमिकी दर्ज लेकिन संसाधनों की कमी बनी चुनौती
बिजली थानाप्रभारी आरएस राय ने बताया कि जेई और एसडीओ को चौरी-चौरा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने को कहा गया था लेकिन उन्होंने भारतीय विद्युत अधिनियम की धारा 136 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई। उनका तर्क था कि ऐसा करने से नई लाइन के लिए सामान स्वीकृत हो सकेगा। पुलिस का कहना है कि सीमित संसाधनों के चलते जांच में दिक्कतें आ रही हैं। जांच अधिकारी राजवीर सिंह ने बताया कि लाइन निर्माण से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए सर्किल कार्यालय को पत्र भेजा गया है और जांच प्रक्रिया जारी है।