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Gorakhpur News: कैंसर में भी प्रभावी है अल्जाइमर की दवा, शोध को मिला पेटेंट

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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने कैंसर के इलाज की दिशा में अहम शोध किया है। शोध के मुताबिक, अल्जाइमर और पार्किंसन जैसे रोगों में दी जाने वाली दवा टीईटीए (ट्राइएथिलीनटेट्रामाइन या ट्राइएंटाइन) कैंसर के उपचार में सक्षम है। डीडीयू प्रशासन के प्रयासों से इसे कंट्रोलर जनरल ऑफ पेटेंट्स, डिजाइसं एंड ट्रेड मार्क्स की ओर से शुक्रवार को पेटेंट मिल गया।
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यह शोध किया है भौतिकी विभाग के प्रो. राकेश कुमार तिवारी और शोधार्थी वंदना मिश्रा ने। प्रो. तिवारी ने बताया कि इस शोध को कंप्यूटर सिम्यूलेशन मेथड से किया गया। इसमें जी-क्वाड्रुप्लेक्स डीएनए को लक्षित करने के लिए टीईटीए नाम के एक केमिकल का अध्ययन एक कैंसर जिन (सी-केआईटी) क्षेत्र में किया गया। इसमें यह पाया गया है कि टीईटीए इस क्षेत्र में जी-क्वाड्रुप्लेक्स डीएनए को स्थिर करने में सक्षम है।
टीईटीए मुख्यतः कॉपर चीलेटर है, जिसका प्रयोग मानव शरीर में कॉपर की अधिकता से होने वाली बीमारियों जैसे लिवर, हाथ पैर कांपना, चिड़चिड़ापन, कमजोर याददाश्त व आंखों के कॉर्निया के चारों तरफ सुनहरा हरा-भूरा रंग का घेरा बनना आदि में किया जाता है। टीईटीए का उपयोग अभी तक कैंसर जैसी बीमारियों के लिए नहीं किया गया है।
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पेटेंट मिलने के बाद भी जारी है अध्ययन
प्रो. राकेश तिवारी ने बताया कि वर्तमान समय में कैंसर के इलाज के लिए कई विधियां जैसे सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी आदि अपनाई जाती है। इसी क्रम में लक्षित कैंसर उपचार मतलब टारगेट कैंसर थेरेपी को प्रभावी पाया गया है। इस पर वर्तमान में शोध जारी है। यह अध्ययन कैंसर के इलाज में लाभदायक सिद्ध होगा। टीईटीए स्वस्थ कोशिकाओं के साथ किस प्रकार व्यवहार करती है यह जानने के लिए अभी अध्ययन जारी है।
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