ऑनलाइन गेमिंग एप से ठगी का मामला
- ठगी के मामले में जेल भेजा गया विक्की पंडित, राकेश प्रजापति से विवाद के बाद बना लिया था अलग गिरोह
- पीलीभीत, रायबरेली और अन्य जिलों में फैला था ठगी का जाल, चार टीमें तलाश में जुटीं
- लेन-देन के विवाद के बाद टूट गया था गुरु-शिष्य का गठजोड़, अब सामने आ रही कई राज्यों तक फैली साजिश
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। ऑनलाइन गेमिंग एप के जरिये लोगों से ठगी करने वाले गिरोहों का बड़ा नेटवर्क पुलिस की जांच में सामने आया है। इस मामले में मुख्य आरोपी राकेश प्रजापति के गुरु बताए जा रहे पीलीभीत के प्रियांशु दीक्षित उर्फ विक्की पंडित को भी पीलीभीत पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि विक्की पंडित ने साइबर ठगी का तरीका दुबई में रहते हुए सीखा था और भारत लौटने के बाद उसने अपने साथियों को यह तरीका सिखाया। इसके बाद कॉल सेंटर की आड़ में ठगी करने लगा था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में विक्की पंडित और गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र का राकेश प्रजापति एक ही गिरोह में मिलकर ऑनलाइन गेमिंग एप के जरिये लोगों को निवेश और भारी मुनाफे का लालच देकर ठगी करते थे। फेयर प्ले-247, एविएटर और रम्मी गेमिंग एप डाउनलोड कराने के बाद पीड़ितों से अलग-अलग बहानों से रुपये जमा कराए जाते थे। शुरुआत में कुछ लोगों को मामूली लाभ देकर भरोसा जीता जाता था, इसके बाद बड़ी रकम फंसा ली जाती थी। करीब तीन माह पहले रुपये के लेन-देन को लेकर दोनों के बीच गंभीर विवाद हो गया। इसके बाद गुरु-शिष्य का यह गठजोड़ टूट गया और दोनों ने अलग-अलग गिरोह बनाकर ठगी का धंधा शुरू कर दिया।
विक्की पंडित ने अपने दो अन्य साथियों हरीपुर के अजीतपुर बिल्ला निवासी अमृत पाल सिंह, उदरहा निवासी धर्मेंद्र कुमार व अन्य साथियों के साथ मिलकर पीलीभीत के घुंघचई में ठगी का नया ठिकाना बनाया, जहां ऑनलाइन गेमिंग एप के जरिये लोगों को निशाना बनाया जाने लगा। वहीं गिरोह के चार अन्य सदस्यों ने रायबरेली में तीसरा ठिकाना बना लिया, जबकि राकेश प्रजापति ने अपने साथी जान आलम व दो अन्य बैंककर्मियों के साथ मिलकर अलग गिरोह खड़ा कर लिया। इस गिरोह ने भी ऑनलाइन गेमिंग और निवेश के नाम पर ठगी का खेल शुरू किया। पुलिस की जांच में सामने आया है कि राकेश का गिरोह बैंक खातों और डिजिटल लेन-देन का दुरुपयोग कर रहा था, जिससे ठगी की रकम को तेजी से इधर-उधर की जा सके।
रायबरेली में भी ठगी का गिराेह है सक्रिय
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इन दोनों गिरोहों के अलावा एक तीसरा गिरोह भी सक्रिय था, जो रायबरेली जिले में ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहा था। जब पीलीभीत और अन्य जिलों में ठगी के मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, तो तीसरा गिरोह सतर्क हो गया। पुलिस कार्रवाई की भनक लगते ही उस गिरोह ने अपने कार्यालय में ताला बंद कर भूमिगत हो जाना ही बेहतर समझा।
निवेश की जानकारी जुटा रही पुलिस
जांच अधिकारी का मानना है कि इन गिरोहों के बीच आपसी संपर्क और जानकारी का आदान-प्रदान भी होता रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी से जुटाई गई रकम कहां-कहां निवेश की गई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शन का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है।
कोट
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की चार विशेष टीमें गठित की गई हैं, जिन्हें अलग-अलग जिलों और संभावित ठिकानों पर भेजा गया है। भागे हुए आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। साथ ही आम लोगों से अपील की गई है कि ऑनलाइन गेमिंग एप या निवेश के नाम पर मिलने वाले लालच से सावधान रहें।
रवि सिंह, सीओ गोरखनाथ