- एसएसपी के निर्देश पर जिले भर में जमानतदारों का री-वेरिफिकेशन शुरू
- फर्जी जमानतदारों के गिरोह के सक्रिय होने की आशंका, पुलिस चला रही अभियान
- गंभीर अपराधों में जमानत पर छूटे आरोपियों पर शिकंजा, पारदर्शिता लाने की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। गंभीर अपराधों में जमानत पर छूटे बदमाशों के खिलाफ पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अब ऐसे मामलों में जमानत दिलाने वाले जमानतदारों का दोबारा सत्यापन कराया जा रहा है। यदि सत्यापन के दौरान कोई जमानतदार फर्जी पाया गया तो न केवल उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी, बल्कि आरोपी की जमानत निरस्त कराकर दोबारा जेल भिजवाया जाएगा। यह कार्रवाई एसएसपी राज करन नय्यर के निर्देश पर शुरू की गई है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हाल के दिनों में कई मामलों में यह तथ्य सामने आया है कि संगठित गिरोहों के माध्यम से पेशेवर जमानतदारों के नाम पर फर्जी दस्तावेज लगाकर आरोपियों को जमानत दिलाई जा रही है। जमानत मिलने के बाद ऐसे आरोपी दोबारा अपराध में लिप्त हो जाते हैं। ऐसे में पुलिस ने जमानतदारों के री-वेरिफिकेशन का अभियान शुरू किया है।
इस अभियान के तहत पुलिस टीमें जमानतदारों के बताए गए पते पर जाकर भौतिक सत्यापन करेंगी। यह भी जांच की जाएगी कि संबंधित व्यक्ति वास्तव में मौजूद है या नहीं और क्या उसी ने आरोपी की जमानत ली थी। पुलिस जमानतदार से यह भी पूछताछ करेगी कि उसने किस आधार पर और किन शर्तों पर जमानत दी थी। यदि जांच में यह पाया जाता है कि जमानतदार का नाम-पता गलत है, दस्तावेज फर्जी हैं या संबंधित व्यक्ति ने जमानत ली ही नहीं, तो इसे गंभीर फर्जीवाड़ा माना जाएगा।
एसएसपी का कहना है कि ऐसे मामलों में अदालत में रिपोर्ट भेजकर आरोपी की जमानत निरस्त कराने अपील की जाएगी। साथ ही फर्जी जमानतदार और जमानत दिलाने में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। पुलिस का मानना है कि कदम से जमानत प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और गंभीर अपराधों में शामिल बदमाशों के लिए जमानत हासिल करना आसान नहीं रहेगा।
एसएसपी राज करन नय्यर ने बताया कि फर्जी जमानतदारों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। यदि किसी भी मामले में यह सामने आता है कि फर्जी जमानतदारों के सहारे जमानत ली गई है, तो ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
फर्जी जमानतदारों की पहले भी सौंपी गई थी सूची
बताया जा रहा है कि पुलिस की इस कार्रवाई से पहले ही एक फरियादी ने फर्जी जमानतदारों के गिरोह को लेकर एक सूची तैयार कर पुलिस को सौंपी थी। आरोप है कि उस गिरोह ने कई मामलों में फर्जी जमानतदारों के जरिए जमानत कराई थी, लेकिन उस समय सूची पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित का दावा है कि यदि अब निष्पक्ष जांच की जाए तो कई मामलों में फर्जी जमानतदारों का नेटवर्क उजागर हो सकता है। फिलहाल पुलिस अभियान के जरिये ऐसे नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में जमानत पर बाहर आए कई आरोपियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।