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Gorakhpur News: हिंदुत्व की विचारधारा और पंच परिवर्तन से बन सकते हैं विश्वगुरु

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खोराबार खेल के मैदान में आयोजित हिंदू सम्मेलन में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्
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आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले बोले-जाति के भेदभाव और छुआछूत के समूल नाश की जरूरत



आरएसएस की ओर से खोराबार खेल मैदान में आयोजित किया गया हिंदू सम्मेलन



अमर उजाला ब्यूरो



गोरखपुर। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने पंच परिवर्तन के महत्व को समझाते हुए कहा कि हिंदुत्व की विचारधारा को अगर हम भूल गए तो राष्ट्र के सामने कई संकट आएंगे। इसलिए हमें अपनी संस्कृति, शक्ति और एकता को समृद्ध करना होगा। जाति के भेदभाव और छुआछूत का समूल नाश की जरूरत है वरना ऐसे लोगों के बीच जाकर धर्म परिवर्तन की साजिशें रची जाएंगी।



उन्होंने कहा कि स्वदेशी को बिना अपनाए स्वतंत्र होने का कोई मतलब नहीं है। इसी मंत्र के जरिये हम विश्व के लिए मॉडल बन सकते हैं। विश्वगुरु की संकल्पना को पूरा कर सकते हैं। सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम के तहत बुधवार को मालवीय नगर स्थित खोराबार खेल मैदान में आयोजित हिंदू सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक जड़ें एक हैं। उपासना पद्धति अलग-अलग हो सकती है, पर धर्म केवल सनातन है। धर्म जीवन जीने की कला है। सनातन धर्म के नाते अपने लोगों ने मानव धर्म के पालन का बीड़ा उठाया वो भी न केवल अपने लिए बल्कि पूरे विश्व की मानवता को प्रकाश देने के लिए है।
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सरकार्यवाह ने कहा कि हिंदू धर्म को पूर्वजों ने तमाम आक्रांताओं से बचाया है। इसलिए धर्म और संस्कृति बचाए रखने के लिए सभी को जागृत होना होगा क्योंकि धर्म के बिना सब कुछ बेकार है। उन्होंने कहा कि भारत के साधकों ने कभी दुनिया का शोषण नहीं किया। हमें अपने समाज को दुनिया का विश्वमित्र बनाना है, भारत को विश्व गुरु बनाना है। इसके लिए हमें अपने घर, आस -पास, अपने समाज को ठीक रखना होगा। अगर हम ठीक से खड़े नहीं होंगे तो हम दूसरे को कैसे ठीक से खड़ा करेंगे।
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सरकार्यवाह ने कहा कि दुनिया संकटों-चुनौतियों से घिरी हुई है। पर्यावरण, जल और युद्ध का संकट है। ऐसे में हिंदू समाज को धर्म का रक्षक बनकर खड़ा होना है और इस संकट का हल ढूंढना होगा। संगठित और संयमित समाज ही राष्ट्र को परम वैभव पर ले जा सकता है। यह तभी संभव है जब व्यक्ति का चरित्र उत्तम हो और यही कार्य संघ की शाखा में किया जा रहा है। व्यक्तिगत चरित्र से राष्ट्रीय चरित्र निर्माण का लक्ष्य लेकर ही संघ और शाखा की संकल्पना की गई।
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