गोरखपुर का खाद कारखाना पांच से 10 किलोमीटर के क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक बदलाव का वाहक बन चुका है। लोकार्पण के बाद इसके जरिए प्रत्यक्ष व अप्रत्क्ष रूप से करीब दस हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। असुरन से लेकर गुलरिहा तक उप नगरीय संस्कृति विकसित हो रही है। स्कूल, होटल, रेस्त्रां, गाड़ियों के शोरूम, अस्पताल खुल रहे हैं। सड़कें और चौराहे चौड़े हो रहे हैं। ऊंची-ऊंची इमारतें बनने लगी हैं। कारखाना से सटे मानबेला, पोखरभिंडा समेत आसपास के इलाकों की जमीन बेशकीमती हो चुकी हैं।
खाद कारखाने की खासियत
- आठ हजार करोड़ की लागत से बना है खाद कारखाना
- 3850 टन नीम कोटेड यूरिया का रोजाना उत्पादन होगा
- 993.75 एकड़ है खाद कारखाने का क्षेत्रफल
- 215 एकड़ में कारखाने के संयंत्र लगे है
- 90 एकड़ ग्रीन बेल्ट
- 95 एकड़ प्रशासनिक भवन
- प्राकृतिक गैस विधि से बनाई जाएगी खाद
- जगदीशपुर से हल्दिया तक बिछी गैस पाइपलाइन से मिलेगी प्राकृतिक गैस
जीडीए की परियोजनाओं से मिलेगा विस्तार
कारखाने के बगल में सैनिक स्कूल बन रहा है। जीडीए मानबेला व उसके आसपास कई नई परियोजनाएं शुरू कर रहा है।
पीएम मोदी ने रखी नींव अब लोकार्पण करेंगे
सांसद रहते हुए मुख्यमंत्री योगी खाद कारखाने के लिए संसद में आवाज उठाते थे। 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद उनकी मेहनत रंग लाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2016 में कारखाने की नींव रखी और अब सात दिसंबर को उसका लोकार्पण करेंगे।
31 वर्ष बाद शुरू होगा कारखाना
पुराना खाद कारखाना 20 अप्रैल 1968 को से शुरू होकर 1990 तक चला। 10 जून 1990 को एक दुर्घटना के बाद मजदूरों ने आंदोलन शुरू कर दिया। इसके बाद कारखाना अस्थायी रूप से बंद हुआ। 2002 में सरकार ने इसे अंतिम रूप से बंद करने का निर्णय लिया और यहां कार्य करने वाले 2400 स्थायी कर्मचरियों को वॉलेंट्री सेपेरेशन स्कीम (वीआरएस) दे दिया गया।