गोरखपुर सीएमओ ने निजी पैथालॉजी को निर्देश दिए हैं कि वे डेंगू के लिहाज से मरीजों की रैपिड जांच कर 24 घंटे में रिपोर्ट दें। जिससे स्वास्थ्य विभाग ऐसे मरीजों की निशुल्क एलाइजा जांच करा सके और उनमें बीमारी होने की पुष्टि होने पर बचाव के कारगर उपाय किए जा सकें।
निजी पैथालॉजी और अस्पतालों में रैपिड किट से डेंगू की जांच प्रतिदिन करीब 800 से एक हजार के बीच हो रही है। लेकिन इन लोगों की एलाइजा जांच नहीं हो पा रही है। इसकी वजह से डेंगू की सही जानकारी स्वास्थ्य विभाग को नहीं हो पा रही है। इसके मद्देनजर सीएमओ डॉ सुधाकर पांडेय ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), नर्सिंगहोम एसोसिएशन और पैथालॉजी एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव को पत्र भी लिखा है। उन्होंने रैपिड जांच की रिपोर्ट 24 घंटे के अंदर स्वास्थ्य विभाग को देने का निर्देश दिया है।
प्रतिदिन रैपिड कार्ड से 800 से 1000 के बीच डेंगू की जांच की जा रही है। इस जांच में प्रतिदिन 30 से 40 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो रही है। लेकिन यह मरीज डेंगू के कं फर्म करने के लिए एलाइजा जांच से पीछे हट रहे हैं। निजी पैथालॉजी में रैपिड कार्ड से जांच के लिए मरीजों को 800 रुपये देने पड़ रहे हैं। जबकि एलाइजा जांच के लिए दो हजार लग रहे हैं। इसकी वजह से लोग जांच से पीछे हट जा रहे हैं। यही वजह है कि सीएमओ ने मामले को संज्ञान में लेते हुए निर्देश दिया है कि रैपिड किट से डेंगू पॉजिटिव आने वाले मरीजों की सूचना 24 घंटे के अंदर दें।