सरकारी कागजों में मृत घोषित नूर मोहम्मद की वास्तविकता जानने उनके गांव पहुंची राजस्व टीम के समक्ष ग्रामीणों ने सीना ठोंककर कहा, यही है नूर मोहम्मद। अमर उजाला में समाचार प्रकाशित होने के बाद शनिवार को टीम मामले की जांच करने जैतपुर के गांव गौसपुर पहुंची थी। पीड़ित नूर मोहम्मद के साथ ही टीम ने गांव वालों के बयान लिए और दस्तावेज इकट्ठा किए।
नूर मोहम्मद और उनके भाई नसरुल्लाह कारोबार के सिलसिले में करीब तीस वर्ष पहले दिल्ली चले गए थे। वर्ष 2008 में गांव में चकबंदी की प्रक्रिया हुई थी। हाल ही में गांव लौटे नूर मोहम्मद को पता चला कि चकबंदी अधिकारी कार्यालय से उनको मृत दर्शाकर गांव के ही कुछ लोगों ने उनकी पैतृक जमीन और आवास अपने नाम करा लिया है।
उनकी समस्या को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। शनिवार को एसडीएम सहजनवां सुरेश कुमार राय के निर्देश पर राजस्व टीम जैतपुर के गांव गौसपुर पहुंची। राजस्वकर्मी जितेंद्र मिश्र और संजय वर्मा ने ग्राम प्रधान प्रतिनिधि उपेंद्र कुमार से मामले की जानकारी ली। गांव के मूल निवासी इबरार अली, अकरम, दिलावर, मो. हसन आदि से नूर मोहम्मद की पहचान करवाई गई।
सभी के बयान दर्ज किए गए। टीम अपनी रिपोर्ट एसडीएम को सौंपेगी। एसडीएम ने बताया कि राजस्व टीम की रिपोर्ट और जमीन के दस्तावेज की जांच के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
उपसंचालक चकबंदी से मांगा न्याय
गांव वालों का समर्थन मिलने से उत्साहित नूर मोहम्मद ने अपना हक पाने के लिए उपसंचालक चकबंदी, जिला मजिस्ट्रेट विजय किरन आनंद और एसएसपी गोरखपुर को पत्र लिख कर न्याय दिलाने की गुहार लगाई है। अधिकारियों को रजिस्टर्ड डाक से भेजी गई चिट्ठी में उन्होंने जान-माल की हानि की आशंका जताई है। उनके अनुसार घर छिन जाने की वजह से गांव में ही वे बहन के आवास पर रहने को मजबूर हैं। जिन लोगों ने षड्यंत्र कर जमीन-मकान छीन लिया है, वह अब परिवार समेत बहन के घर वालों को भी धमकी दे रहे हैं।