रेट तय होते ही फाइनल हो जाएगा मामला
गीडा सूत्रों का कहना है कि करीब-करीब 90 प्रतिशत सहमति बन चुकी है। अब मुख्य मामला जमीनों के रेट को लेकर है। कंपनी चाहती है कि सरकारी जमीन मिले, जिससे जमीन पर कंपनी को कम से कम निवेश करना पड़े। गीडा प्रशासन भी नए औद्योगिक एरिया के लिए जमीनों को खरीद रहा है, लिहाजा वह भविष्य की संभावनाओं को देखकर निर्णय लेना चाहता है।
इसीलिए जमीन देखने आए प्रतिनिधि अब इस पर अंतिम निर्णय कंपनी के निदेशक मंडल की सलाह पर करने की बात कहकर गए हैं। वहीं, गीडा प्रशासन भी इस मामले में चर्चा के बाद निर्णय लेने की बात कह रहा है। माना जा रहा है कि जमीन के रेट का मामला सुलझते ही पूरा प्रकरण मुख्यमंत्री के समक्ष जाएगा, जहां एमओयू पर हस्ताक्षर कराया जाएगा।
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जल्दी ही कई और भी आएंगे
अदाणी समूह के अलावा सात और कंपनियों के प्रतिनिधियों ने गोरखपुर आने की हामी भरी है। गीडा प्रशासन इन उद्यमियों को भी जमीन दिखाने की तैयारी कर चुका है। इनके लिए कालेसर जीरो प्वाइंट से लेकर भीटी रावत और धुरियापार में अलग-अलग जगह चिह्नित किए गए हैं। गीडा एसडीएम अनुपम मिश्रा बताते हैं-अदाणी समूह, आरएसपीएल और लुलु माॅल जैसी कंपनियों की वजह से गीडा की ब्रांडिंग नेशनल लेवल पर हुई है। हमारा प्रयास है कि महीने भर के भीतर तीन-चार बड़ी कंपनियों से एमओयू करा दिया जाए, ताकि अन्य कंपनियां भी गीडा आएं।
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सीईओ गीडा अनुज मलिक ने कहा कि अदाणी समूह के प्रतिनिधि जमीन देखकर गए हैं। उनसे इस पर चर्चा भी हुई है। अब शासन स्तर पर वार्ता होगी। वहीं कंपनी के प्रतिनिधि भी निदेशक स्तर पर इसकी जानकारी देंगे। पूरा प्रयास है कि मार्च तक इस मामले में एमओयू करा दिया जाए। इसके अलावा कई अन्य प्रतिनिधियों से भी वार्ता चल रही है। उन्हें भी जल्दी ही जमीन दिखाकर एमओयू के लिए तैयार किया जाएगा।