नर्सिंग हॉस्टल की भी पहुंच गई थी शिकायत
एम्स सूत्रों ने बताया कि परिसर के अंदर नर्सिंग हॉस्टल बनाया जाना था। ये काम एम्स की एक कार्यदायी संस्था की ओर से किया जाना था, लेकिन निदेशक ने इस काम को दूसरी फर्म से करवाने की निविदा निकाली दी। इसकी निविदा पांच करोड़ रुपये कर टेंडर फाइनल भी कर दिया। स्वास्थ्य मंत्रालय से इसकी भी शिकायत हो गई थी। सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय की तरफ से पूछा गया का कि साढ़े तीन करोड़ रुपये में तैयार होने वाले प्रोजेक्ट को पांच करोड़ रुपये का किस आधार पर बनाया गया?
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छात्रावास के हॉस्टल 11 बजे तक खोलना भी पड़ा भारी
एम्स के अंदर छात्र और छात्राओं का हॉस्टल है। सूत्रों ने बताया कि एक संस्था की तरफ से यहां कुछ काम किया जा रहा था, जो रात 9 बजे तक चलता था। फर्म को लाभ देने के लिए देर रात 11 बजे तक हॉस्टल के खोले जाने की अनुमति दे दी गई थी। ये बात भी कार्यकारी निदेशक के लिए मुसीबत बन गई। आरोप है कि इसमें भी कुछ लापरवाही की गई थी।
कोरोना में रेड पेन चलाना भी बन गया मुसीबत
सूत्रों ने बताया कि एम्स के निदेशक के बेटों का हस्ताक्षर दूसरे लगाते थे। कोविड काल में एम्स के चिकित्सकों की ड्यूटी सुबह 9 बजे से थी। इस दौरान देर से मरीजों का इलाज कर अगले दिन एम्स पहुंचने पर अगर लेट हो जाता तो कार्यकारी निदेशक की तरफ से रेड पेन चलाकर उन्हें अनुपस्थित कर दिया जाता। इसके विरोध में भी एक खेमा तैयार हो गया था। उन्हें शिकायत थी कि अपने बेटों को इतनी छूट, लेकिन थोड़ी देर विलंब होने वाले चिकित्सकों को अनुपस्थित कर देना, तानाशाही है।
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