गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) का बकाया जमा कराने में वाणिज्य कर विभाग को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विभाग की तरफ से नोटिस भी जारी किया गया है, लेकिन बकाया जमा नहीं हो पा रहा है। विभाग ने आरसी जारी करना शुरू किया है। इसके अलावा, अब खातों पर रोक लगाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
वाणिज्य कर विभाग में करीब 70 हजार व्यापारियों का जीएसटी पंजीकरण है। इनमें से करीब 50 हजार व्यापारी ऐसे हैं जिन पर पिछले वर्षों का टैक्स बकाया है। इनके खिलाफ विभाग नोटिस जारी कर चुका है। अनुमानत: 100 करोड़ से अधिक का टैक्स बाकी है। परंतु, फरवरी में बड़े प्रयास के बाद लगभग सवा करोड़ रुपये जमा हो पाए। यह रकम भी पिछले साल के मुकाबले सर्वाधिक है।
विभागीय अफसरों का कहना है कि बकाएदार व्यापारी टैक्स जमा करने की बजाय बचने का उपाय खोजते रहते हैं। इसके चलते कई बार उन्हें पेनाल्टी के तौर पर अतिरिक्त धन जमा करना पड़ता है। अगर समय से टैक्स जमा करते हैं तो उन्हें कठोर कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।
विभाग फ्रीज कर रहा खाता
बकाएदारों से वसूली के लिए अन्य उपायों के साथ-साथ व्यापारियों के खाता संचालन पर भी रोक लगाई जा रही है। खाते से लेनदेन बंद होने पर व्यापारियों का कार्य भी प्रभावित होता है। इसे देखते हुए व्यापारी जल्द से जल्द पैसा जमा कर रहे हैं। अब खातों को भी फ्रीज किया जा रहा है। हालांकि विभाग पहले इस तरह की कठोर कार्रवाई से बचता रहा है।
वसूली कर उपायुक्त डॉ. सत्यमेव जयते भारत लोकमंगल ने कहा कि सभी बकाएदारों को नोटिस भेजकर बकाया जल्द जमा करने को कहा गया है। तमाम व्यापारी ऐसे हैं, जिन पर कई साल पुराना टैक्स बकाया है। नोटिस के बाद जिनका बकाया जमा नहीं हो रहा है, उन्हें आरसी जारी की जा रही है। अगर इसके बाद भी जमा नहीं किया तो खाता फ्रीज करने की कार्रवाई हो सकती है।