मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. वाणी आदित्य ने बताया कि हेपेटाइटिस जानलेवा बीमारी है। इसका सटीक इलाज नहीं है। 30 फीसदी मामलों में यह क्रॉनिक हो जाता है। इस कारण लिवर पूरी तरह से खराब हो सकता है। संक्रमित मां से बच्चे को भी संक्रमण हो सकता है। यह खतरा 60 फीसदी तक है। यही कारण है कि प्रसव पूर्व इसकी जांच कराई जाती है।
पहले प्रसव के दौरान पता चली बीमारी
शोध में पता चला कि गर्भवतियों को इस बीमारी की जानकारी प्रसव के दौरान होने वाली जांच के बाद हुई। चिंता की बात यह रही कि जिन लोगों को यह बीमारी हुई है, उनमें 90 फीसदी महिलाएं पढ़ी लिखी थीं। उन्होंने बताया कि शहर में खुले पॉर्लर से टैटू बनवाए थे।
बिना सोचे समझे गुदवा रहे टैटू
मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि ज्यादातर युवा बिना सोचे समझे टैटू गुदवा लेते हैं।जबकि यह शौक उन्हें गंभीर बीमारी दे रहा है। खिलाड़ियों सहित अन्य सेलेब्रिटी को देखकर युवा टैटू बनवा रहे हैं। उन्हें इस बात की समझ नहीं है कि जो सेलेब्रिटी या खिलाड़ी टैटू गुदवाते हैं, वह विशेषज्ञों के पास जाते हैं। इसके लिए काफी रुपये खर्च करते हैं। जबकि कम पैसों में टैटू बनाने वाले सैनिटाइजेशन पर ध्यान नहीं देते हैं।