सघन क्षय रोगी खोज अभियान (एसीएफ कैंपेन) ने अनुराधा और बबिता (बदला हुआ नाम) को टीबी मुक्त जीवन की सौगात दी है। दोनों युवतियों का कहना है कि लक्षण दिखने पर तत्काल जांच करानी चाहिए। जांच में अगर टीबी की पुष्टि होती है तो दवा का पूरा कोर्स लेना चाहिए। जिले में नौ से 22 मार्च तक एक बार फिर एसीएफ कैंपेन चलाने की तैयारी है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ रामेश्वर मिश्र ने बताया कि नौ से 22 मार्च तक प्रस्तावित एसीएफ कैंपेन के दौरान 9.61 लाख लोगों के बीच से टीबी के संभावित रोगी ढूंढे जाएंगे। ऐसे मरीजों की जांच कराने के बाद पुष्ट टीबी मरीजों का निशुल्क उपचार शुरू होगा। दो सप्ताह या अधिक समय तक खांसी आना, खांसी के साथ बलगम आना, बलगम में कभी-कभी खून आना, सीने में दर्द होना, शाम को हल्का बुखार आना, वजन कम होना और भूख न लगना टीबी के सामान्य लक्षण हैं। ऐसे लक्षणों वाले लोगों को टीबी की जांच अवश्य करानी चाहिएं। जिले में टीबी के 5498 सक्रिय मरीज हैं, जिनका निशुल्क इलाज चल रहा है ।
डॉ. रामेश्वर मिश्रा ने बताया कि एसीएफ कैंपेन में 387 टीम लगेंगी। टीम के कुल 1,161 सदस्य लक्षित आबादी में घर-घर जाकर टीबी मरीज ढूंढेंगे। अभियान में 86 सुपरवाइजर, 21 मेडिकल ऑफिसर और 46 लैब टेक्नीशियन (एलटी) भी लगाए गए हैं।