आरोपी सुनील के घरवालों ने सीओ के साथ ही एसएसपी को प्रार्थना पत्र देकर महिला द्वारा फर्जी केस दर्ज कराने की जानकारी दी, लेकिन किसी ने संज्ञान नहीं लिया। जिसके बाद पीड़ित परिवार के लोगों ने खुद खोजबीन शुरू की। जिसमें पता चला कि मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला दलित नहीं है।
वह मूल रुप से संतकबीरनगर जिले की रहने वाली व दूसरे धर्म की है। कोर्ट व विवेचक को दिए बयान में महिला ने अपनी उम्र 35 वर्ष बताई है। जबकि उसका वास्तविक उम्र 55 साल है। परिवार के लोगों ने एडीजी जोन दावा शेरपा को मामले की जानकारी दी। उनके निर्देश पर एसपी नार्थ अरविंद पांडेय ने जांच की तो शिकायत सही मिली। एसपी की जांच रिपोर्ट आने के बाद फिर से विवेचना कराए जाने का फैसला लिया गया है।