गोरखपुर शहर के उत्तरी छोर पर रामगढ़ताल की तर्ज पर चिलुआताल को विकसित किया जा रहा है। इसके सुंदरीकरण का काम पूरा होने पर पर्यटन का नया विकल्प लोगों को मिल जाएगा।
बालापार रोड के सोनबरसा में बने महायोगी गुरु गोरखनाथ विश्वविद्यालय और फर्टिलाइजर के बीच में चिलुआताल है। इसका एक हिस्सा सोनौली हाईवे के महेसरा पुल से होकर ओंकारनगर के करीब जंगल नंदलाल तक फैला है। इसमें फर्टिलाइजर के पीछे अमवा जंगल के किनारे ताल के हिस्से में काम चल रहा है।
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बृहस्पतिवार की दोपहर 01.59 बजे घाट बनाने के लिए जेसीबी से मिट्टी खोदकर पत्थरों को जाली में बांधा जा रहा था। ताल में मछली पकड़ रहे अमवा के विपत और श्याम ने बताया कि अभी कुछ देर पहले जेसीबी चल रही थी। यहां काम कर रहे पांच-छह लोग खाना खाने चले गए हैं। घाट तक पहुंचने के लिए सड़क कच्ची सड़क बन चुकी है।
560 मीटर में बनेगा पक्का घाट, 20 करोड़ का बजट
चिलुआताल में पर्यटन विभाग की ओर से काम कराया जा रहा है। इसमें 560 मीटर पक्काघाट के अलावा ट्रैक, गजेबिया, बेंच और शौचालय बनाया जाएगा। इसके लिए कुल 20 करोड़ का प्रस्ताव तैयार हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक, चिलुआताल को रामगढ़ताल की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। यहां खाने-पीने के सामान की व्यवस्था होगी। इसका काम वर्ष 2024 में पूरा कराने का लक्ष्य रखा गया है।