प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना।
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प्रधानमंत्री आवास के लिए फर्जी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने पर सर्वे कंपनी को राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) ने डिबार कर दिया है। इसके साथ ही ऐसा करने पर मेसर्स सरयू बाबू इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड पर 30 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
गोरखपुर में मेसर्स सरयू बाबू इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड प्रधानमंत्री आवास के पात्रों का सर्वे कर डीपीआर सूडा को भेज रही थी। कंपनी द्वारा गोरखपुर में ऐसे 43,000 लोगों की डीपीआर बनाकर सूडा को भेजी गयी। कंपनी ने इसमें 12,200 अपात्रों को भी शामिल कर लिया था। सूडा के क्रॉस चेकिंग में कंपनी का यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। इसके बाद कंपनी को सूडा द्वारा न सिर्फ डिबार कर दिया गया बल्कि 30 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
डूडा परियोजना अधिकारी विकास कुमार सिंह ने कहा कि 25 प्रतिशत से ज्यादा अपात्रों की डीपीआर बनाने पर सूडा द्वारा कंपनी को डिबार कर दिया गया है। साथ ही उस पर करीब 30 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। डीएम के निर्देश पर नगर आयुक्त ने नई कंपनी के चयन के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है।
2017 से कंपनी कर रही थी पीएम आवास के लिए सर्वे
जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) के अंतर्गत शासन की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) संचालित है। इसके अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को मकान बनाने के लिए तीन किस्तों में 2.50 लाख रुपये की अनुदान राशि मिलती है। वर्ष 2017-2018 से कंसलटेंट संस्था मेसर्स सरयू बाबू इंजीनियर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड लिमिटेड कंपनी गोरखपुर में प्रधानमंत्री आवास के पात्रों के चयन का कार्य कर रही थी।