बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने चार दिन के नवजात को नई जिंदगी दी है। जन्म से नवजात का आहार नाल न विकसित होने से एक हिस्सा सांस की नली से जुड़ा था। इसकी वजह से उसके दिल की धड़कन बढ़ गई थी। डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर आहार नली को सांस की नली से अलग कर उसे जोड़ा गया।
मासूम की हालत बेहतर होने पर उसे डिस्चार्ज कर दिया गया है। डॉक्टरों की भाषा में इसे इसोफेजियल अट्रेजिया विद ट्रेकिया एसोफिजिअल नाम की बीमारी कहते हैं। यह 20 हजार नवजातों में एक को होती है।
जानकारी के मुताबिक देवरिया के भगौतीपुर निवासी रजनी ने दो दिन पूर्व बच्चे को सरकारी अस्पताल में जन्म दिया। जन्म के कुछ देर बाद ही नवजात की सांस उखड़ने लगी। इस पर डॉक्टरों ने एनआईसीयू में भर्ती किया। जांच की गई तो पता चला कि नवजात में आहार नाल विकसित नहीं थी।
इसकी वजह से उसके दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी। परिजन नवजात को लेकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। जहां पर पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. रेनू कुशवाहा ने बच्चे की जांच करते हुए सर्जरी का फैसला किया। कोविड के बाद पहली बार इस तरह का ऑपरेशन बीआरडी में हुआ है। इस दौरान एनेस्थीसिया के डॉ. आनंद अग्रवाल मौजूद रहे।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. रेनू कुशवाहा ने कहा कि इस तरह के मामलों में मासूम केवल पांच से छह दिनों तक ही जिंदा रहते हैं। इस बीच अगर सही समय पर ऑपरेशन नहीं हुआ तो फिर बचा पाना मुश्किल है। नवजात का सही समय पर ऑपरेशन कर दिया गया। वह सुरक्षित है। उसे डिस्चार्ज कर दिया गया है।