गोरखपुर। स्वामी विवेकानंद केंद्र उत्तर प्रदेश के प्रांत प्रशिक्षण प्रमुख प्रो. विनोद सोलंकी ने कहा कि नशा व्यक्ति, परिवार और समाज के लिए विनाश का कारण बन रहा है। युवाओं और विद्यार्थियों को नशे से दूर रहकर समाज में नशामुक्ति के लिए जागरूकता फैलाने की जरूरत है।
शुक्रवार को गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित सात दिवसीय संगोष्ठी में वक्ताओं ने अपनी बात कही। मुख्य वक्ता स्वामी विवेकानंद केंद्र उत्तर प्रदेश के प्रांत प्रशिक्षण प्रमुख प्रो. विनोद सोलंकी ने कहा कि सुखी जीवन की कल्पना मन से होती है और मन के भी अनेक व्यसन होते हैं। इन पर नियंत्रण करना ही मन का नियंत्रण है। विद्यार्थियों को कठिन विषय पढ़ने के बाद उपनिषदों की बोध कथाओं का अध्ययन करना चाहिए। इससे जीवन को बेहतर दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि संतों के साहित्य का अध्ययन जीवन को सही दिशा देता है। हमें अपने व्यसनों में विद्या-व्यसन को जोड़ना चाहिए। राष्ट्रभक्ति, गोरक्षा और भारतीय संस्कृति के संरक्षण को जीवन का संकल्प बनाने की जरूरत है। कटक, ओडिशा से आए महंत शिवनाथ ने कहा कि नशे के दुष्प्रभाव जानने के बाद भी लोग इस पर नियंत्रण नहीं कर पाते। मद्यपान से प्राणशक्ति का नाश होता है जबकि भांग और तंबाकू के सेवन से ध्यानशक्ति का ह्रास होता है। इनके सेवन के दुष्परिणाम व्यक्ति को भुगतने पड़ते हैं। नीमच, मध्य प्रदेश से आए योगी लालनाथ ने कहा कि नशे से व्यक्ति का जीवन नष्ट होने के साथ आने वाली पीढ़ी भी प्रभावित होती है। जिस घर में नशे का प्रचलन हो जाता है, वहां अनेक समस्याएं पैदा हो जाती हैं।
-कुसंगति नशे का प्रमुख कारण, संगति का रखें ध्यान : डॉ. योगी महेंद्रनाथ
राजस्थान के हिंगवा से आए महंत डॉ. योगी महेंद्रनाथ ने कहा कि संगति का जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। कुसंगति नशे का प्रमुख कारण है। नई पीढ़ी को ध्यान देना चाहिए कि वह किस प्रकार के लोगों के साथ रहती है। अच्छे लोगों की संगति से जीवन को अनेक प्रकार के व्यसनों से बचाया जा सकता है। उन्होंने अधिक सोने और अधिक खाने को भी एक प्रकार का व्यसन बताया।
-अनमोल है मनुष्य जीवन : प्रो. शिवशरण
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व आचार्य प्रो. शिवशरण दास ने कहा कि मनुष्य जीवन अनमोल है। नशा व्यक्ति को विनाश की ओर ले जाता है। नशे के कारण शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होने के साथ सोचने-समझने की शक्ति भी प्रभावित होती है। नशा व्यक्ति को परिवार और समाज से दूर कर एकाकी बना सकता है और उसे अपराध की ओर भी ले जा सकता है।
-नशे से शरीर के सभी अंगों पर पड़ता है असर : महंत ब्रह्मचारी लालदास
आगरा से आए महंत ब्रह्मचारी लालदास ने कहा कि नशे से शरीर के सभी अंग प्रभावित होते हैं। बच्चों और विद्यार्थियों की स्मरणशक्ति पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ता है। जिज्ञासावश किसी नशीले पदार्थ का सेवन शुरू करना आगे चलकर आदत बन सकता है।
-नशा मस्तिष्क में करता है रासायनिक बदलाव : डॉ. पृथ्वीनाथ सिंह
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, अंबेडकरनगर के सीनियर रेजिडेंट डॉ. पृथ्वीनाथ सिंह ने कहा कि मित्रों के दबाव और प्रोत्साहन से युवा अक्सर नशे की शुरुआत करते हैं। नशा केवल सामाजिक बुराई नहीं बल्कि एक विकार है। इसके सेवन से मस्तिष्क में रासायनिक बदलाव होते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता गोरक्षपीठ के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ ने की। वैदिक मंगलाचरण अश्वनी त्रिपाठी ने और गोरक्ष अष्टक पाठ मृत्युंजय उपाध्याय और गौरव तिवारी ने किया। आभार ज्ञापन महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संयुक्त सचिव रामजन्म सिंह ने और संचालन डॉ. श्रीभगवान सिंह ने किया।
इस अवसर पर अयोध्या से आए महंत रामलखन दास, कटक से महंत शिवनाथ, नासिक से महंत योगी विलासनाथ, राजस्थान के हिंगवा से योगी महेंद्रनाथ, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास और मां पाटेश्वरी शक्तिपीठ देवीपाटन के महंत मिथिलेश दास सहित अनेक संत-महात्मा, शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।