कोरोना आपदा और लॉकडाउन को गोरखपुर जिले के बांसगांव ब्लॉक के जिगिना जियांव गांव के शिव शक्ति स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने अवसर में तब्दील कर दिया। इन महिलाओं ने लॉकडाउन के दौरान पीपीई किट, मास्क, स्कूल यूनीफार्म, स्कूल बैग आदि सिल कर देश हित का तो कार्य किया ही, खुद भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हुईं।
शिव शक्ति स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष संगीता बताती हैं कि वर्ष 2015 में गठित उनके समूह में 14 सदस्य हैं। सभी महिलाएं सिलाई-कढ़ाई में पारंगत हैं। कोरोना के कारण लॉकडाउन इस समूह के लिए अवसर लेकर आया। पहली लहर में जब पीपीई किट विदेशों से मंगाई जा रही थी तो समूह ने उसका निर्माण शुरू किया।
पहली लहर में सात हजार पीपीई किट बनाई गईं। इसमें समूह की प्रत्येक सदस्य को दस हजार रुपये प्रतिमाह तक की आय हुई। पीपीई किट के साथ ही मास्क निर्माण भी किया गया।
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चिड़ियाघर स्थित स्टॉल पर मौजूद शिव शक्ति स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष संगीता।
- फोटो : अमर उजाला।
समूह ने पहली लहर में 16 हजार और दूसरी लहर में चार हजार मास्क बना कर नगर निगम और सरकारी एजेंसियों के जरिए बेचे। प्रत्येक मास्क पर तीन रुपये की बचत हुई।
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चिड़ियाघर गोरखपुर में स्टॉल के जरिए बेचे जा रहे समूह के उत्पाद
- फोटो : अमर उजाला।
इनके अलावा स्कूल यूनीफार्म और स्कूल बैग भी समूह की महिलाओं ने सिल कर शिक्षा विभाग को सौंपे। कोषाध्यक्ष साधना कहती हैं कि बीते 14 माह में प्रत्येक महिला सदस्य ने 75-80 हजार रुपये की कमाई की।
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सिलाई करती समूह की महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला।
महिला सदस्यों ने बताया कि एनआरएलएम के अधिकारियों की ओर से अच्छा सहयोग मिलने के कारण सभी उत्पाद हाथों हाथ बिक जाते हैं। समूह को देख अब गांव की अन्य महिलाएं भी इसमें जुड़ना चाहती हैं।
राष्ट्रीय आजीविका मिशन के जिला मिशन प्रबंधक सचिन यादव ने बताया कि स्वयं सहायता समूह के उत्पादों को प्लेटफार्म उपलब्ध कराने के लिए गोरखपुर चिड़ियाघर में स्टॉल उपलब्ध कराया गया है साथ ही मंडल के जिलों में होने वाले महोत्सव में भी उनके उत्पाद डिस्प्ले करवाए जाते हैं।