जब मुख्य कार्यपालक अधिकारी के साथ वार्ता विफल रही तो परिचालक अपनी बात रखने के लिए गोरखनाथ मंदिर पहुंच गए, लेकिन उन्हें अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया। इसके बाद परिचालक पैदल ही डीएम कार्यालय पहुंच गए, जहां एडीएम सिटी से मिलकर उन्होंने अपनी बात रखी।
इसके बाद एडीएम ने परिचालकों को नौकरी देने वाली निजी फर्म से वार्ता की, जिसके बाद परिचालकों के खाते में दो माह का वेतन आया। वेतन आने के बाद करीब दो बजे परिचालकों को हड़ताल समाप्त हुआ और इलेक्ट्रिक बसों का संचालन फिर से शुरू हो सका।
बसें नहीं मिलने से परेशान हुए लोग
इलेक्ट्रिक बसों के पहिए थमने से इससे यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानियों से जूझना पड़ा। स्कूल, कॉलेज और दफ्तर जाने वाले लोग काली मंदिर गोलघर, असुरन चौक, शास्त्री चौक, यूनिवर्सिटी चौक, महेसरा, गोरखनाथ सहित तमाम जगहों पर इंतजार करते रहे, लेकिन बसें नहीं मिलने से दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा दिक्कत सुबह गीडा क्षेत्र में स्थित शैक्षणिक संस्थानों को जाने वाले लोगों को हुई।
सिटी बसों का संचालन करने वाले चालकों का आरोप है कि बीते चार महीने से उनके वेतन का भुगतान नहीं हुआ है। ऐसे में उनके घर खर्च से लेकर मकान का किराया देने तक के लाले पड़ गए हैं। उन्होंने बताया कि माली हालत इस कदर खस्ता हो गई है कि डिपो तक आने-जाने का किराया भी नहीं बच रहा है। ऐसे में आगे काम कर पाना मुश्किल है।
इसके पहले भी परिचालकों ने वंशिका एचआर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के ड्यूटी इंचार्ज को पत्र लिखकर वेतन भुगतान की मांग की थी। लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर मंगलवार को सभी परिचालकों ने हड़ताल शुरू कर दिया।
यात्री रहे परेशान
शिवानी शर्मा ने कहा कि सुबह आठ बजे से कॉलेज लगता है। ऐसे से सुबह 6:30 बजे की सिटी बस पकड़कर गीडा जाती हूं, बस नहीं मिलने से परेशानी हुई। तीन जगहों पर ऑटो बदल कर कॉलेज पहुंच सकी।
अमूल्य श्रीवास्तव ने कहा कि हर दिन सिटी बस से ही कॉलेज जाता हूं। क्योंकि कम पैसों में ये बस कॉलेज पहुंचा देती है। लेकिन आज बस नहीं मिलने से दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बड़े भाई को बाइक से कॉलेज छोड़ना पड़ा।
शीतल ने कहा कि जरूरी काम से गोलघर जाना था, लेकिन बस नहीं मिली। इसके बाद ऑटो से गोलघर गई। बस नहीं मिलने से काम खत्म करके के बाद भी ऑटो से ही वापस आना पड़ा। इससे दिक्कत हुई।
संतोष मणि ने कहा कि सिटी बस से नियमित सफर करता हूं, क्योंकि कम किराए पर ये बसें पहुंचा देती हैं। लेकिन मंगलवार को बस नहीं मिली, जिससे ऑटो से जाना पड़ा। इससे परेशानी भी हुई।
मुख्य कार्यपालक अधिकारी सिटी बस सेवा पीके तिवारी ने कहा कि परिचालकों को नौकरी पर रखने वाली निजी फर्म ने उनका वेतन रोक दिया था। उनसे बातचीत के बाद दो महीने का वेतन मिल गया, जिसके बाद उन्होंने हड़ताल खत्म कर दी।