कोरोना संकट को देखते हुए शादी समारोहों में लोगों की संख्या सीमित करने के सख्त शासनादेश के बाद अचानक ही थानेदारों की पूछ बढ़ गई है। जिनके घरों में शादी है, वे परिचितों के माध्यम से थानेदार को कार्ड देकर आमंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी कोशिश है कि दस मिनट के लिए ही सही, थानेदार समारोह में आ जाएं, ताकि शादी में कोई खलल न पड़े।
नए शासनादेश के मुताबिक, शादी समारोहों में लोग मानक से ज्यादा न हो, इसकी निगरानी की जिम्मेदारी पुलिस की है। ऐसे में लोग उनको न्योता देने में तरजीह दे रहे हैं, जो सामाजिक पकड़ रखते हों और जिनकी थानेदार से अच्छे संबंध हों। उनको न्योता देने के साथ ही अगले पल यह पूछ ले रहे हैं कि फलां थाना क्षेत्र में शादी है, वहां के थानेदार आपके परिचित हैं क्या? अगर हैं तो एक कार्ड आप का परिचय देकर, उन्हें भी दे आता। उधर, थानेदार सजग हैं। अफसरों ने कार्रवाई की जिम्मेदारी उन्हें सौंप रखी है, इस वजह से वह कानूनी बंदिशों में ही रहने में ही भलाई समझ रहे हैं।
केस एक
11 दिसंबर को सूरजकुंड के एक व्यक्ति के घर में शादी है। उनकी पहचान सत्ताधारी दल के एक नेता से है। उन्होंने उस नेता को फोन कर न्योता दिया, जरूर आने की गुजारिश की, और लगे हाथ यह भी पूछ लिया कि शाहपुर इलाके में बारात जानी है, वहां के थानेदार परिचित हैं क्या? थानेदार आ जाते तो अच्छा होता। यह सुनकर नेताजी सोचने लगे कि न्योता उनको दिया जा रहा है या फिर थानेदार को।
केस दो
सात दिसंबर को राजघाट इलाके के एक युवक की शादी है। बारात रामगढ़ताल इलाके में जानी है। उन्होंने एक परिचित को फोन कर न्योता दिया, फिर कहा कि रामगढ़ताल थानेदार आपके परिचित हैं शायद, आप कहते तो आप का हवाला देकर उन्हें भी कार्ड दे आता। थानेदार आ जाएंगे तो शादी समारोह में कोई दिक्कत नहीं होती। कुछ करिए कि वह बस दस मिनट के लिए ही सही, शादी में जरूर आ जाएं।
जानकारी के मुताबिक, शादी समारोहों में लोगों की संख्या सीमित रखने से संबंधित शासनादेश जबसे आया है, लोग परेशान हैं कि किसे न्योता दें और किसे मना करें। जिन लोगों ने पहले ही कार्ड बांट दिया है, उनकी कोशिश है कि पुलिस वाले तय संख्या से अधिक लोगों को नजरअंदाज कर देंगे तो वे कार्रवाई से बच जाएंगे।