गोरखपुर के रामगढ़ताल में गिरने वाले शहर के गंदे पानी को शुद्ध करने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से बना सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बंद है। इस कारण 18 छोटे-बड़े नाले-नालियों से कई मोहल्लों का पानी सीधे रामगढ़ताल में गिर रहा है। इससे उठने वाली दुर्गंध इतनी तेज है कि बाईपास रोड से गुजरने वाला हर कोई व्यवस्था को कोस रहा है। इस तरह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट को पलीता लगाया जा रहा है। वहीं, देवरिया बाईपास से लेकर सहारा इस्टेट तक ताल के पानी में जमी डेढ़ इंच की काई उसकी खूबसूरती पर अलग से दाग लगा रही है।
गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की टीम के निरीक्षण में सामने आया है कि ताल में गंदा पानी सीधे गिराया जा रहा है। जीडीए के उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह के निर्देश पर टीम ने स्टीमर से निरीक्षण किया। लोगों ने टीम को बताया कि जल निगम द्वारा चिड़ियाघर के पास बनाया गया एसटीपी कई दिनों से बंद है। इस कारण कई इलाकों का गंदी पानी बिना शोधन के ताल में गिर रहा है।
निरीक्षण के दौरान 18 नाला-नालियां ऐसी मिले जिनसे शहर के विभिन्न इलाकों का गंदा पानी ताल में सीधे गिरता दिखा। टीम ने निरीक्षण के बाद जीडीए उपाध्यक्ष को स्थिति के बारे में जानकारी दी। सूत्रों के मुताबिक एसटीपी बंद होने से ताल में गिर रहे गंदे पानी के बारे में प्राधिकरण अब जलनिगम को पत्र लिखेगा। साथ ही खुले नालों की टैपिंग तक काई की सफाई और दुर्गंध रोकने के लिए वैकल्पिक प्रयासों पर मंथन शुरू कर दिया है।
जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह का कहना है कि ताल के पानी की शुद्धता बरकरार रखने के लिए जलकुंभी की लगातार सफाई कराई जा रही है। ताल से गाद निकासी को लेकर भी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। नाले-नालियों की टैपिंग के लिए जलनिगम व नगर निगम द्वारा कार्य किए जा रहे हैं। यह तय किया गया कि प्राधिकरण ताल में तैरने वाले (प्लंकटांस) ऐसे पौधों का उपयोग करेगा जो पानी से प्रदूषक तत्वों को अवशोषित कर लेते हैं। जीडीए के अधिशासी अभियंता को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। जल्द ही तय कर लिया जाएगा कि किस विधि से और कैसे ताल के पानी की गुणवत्ता को बचाए रखा जा सकता है।