स्वतंत्र सिंह का कहना है कि अब यह जिला चीनी का कटोरा तो नहीं रहा लेकिन मशरूम का हब जरूर बन सकता है। इसी संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए वह जिले के किसानों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
स्वतंत्र सिंह इन दिनों दस हजार वर्ग फुट में मशरूम की खेती कर रहे हैं। साथ ही अन्य किसानों को उम्दा क्वालिटी के बीज उपलब्ध कराकर खेती की बारीकियां बता रहे हैं। यहां के वातावरण में आयस्टर, मिल्की, पैडीस्ट्रा, बटन और हीरेसियम प्रजाति के मशरूम की पैदावार अच्छी हो रही है।
ऐसे हो रही मशरूम की खपत
स्वतंत्र सिंह बताते हैं कि मशरूम सिर्फ सब्जी के काम नहीं आता। इससे अचार, मोरब्बा, पाउडर, बिस्किट, फेसवॉस आदि भी तैयार होते हैं। जल्द ही प्रवासी मजदूरों को इसकी निःशुल्क ट्रेनिंग दी जाएगी।