देवरिया जिले के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़े की जांच ने फिर तेजी पकड़ ली है। एसटीएफ ने बीएसए से आठ संदिग्ध शिक्षकों के शैक्षिक रिकॉर्ड सहित अन्य ब्योरा मांगा है। ब्योरा देने में लेटलतीफी होने पर एसटीएफ की ओर से शिक्षा महानिदेशक को पत्र लिखा गया था। अब शिक्षा महानिदेशक ने बीएसए को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किया है। बेसिक कार्यालय की ओर से इन शिक्षकों के रिकॉर्ड जुटाए जा रहे हैं।
शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़े को लेकर पुन: देवरिया जिला शासन के रडार पर है। चर्चा है कि वर्ष 2000 के बाद अधिकारियों ने नियुक्ति व सत्यापन पटल देख रहे कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर नौकरियां बांटी। जिले के परिषदीय स्कूलों मेें अभी भी 500 से अधिक शिक्षक फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर यहां नौकरी कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने कार्यकाल के शुरुआती दौर में ही शिक्षक भर्ती में व्यापक पैमाने पर हुए फर्जीवाड़े की जांच एसटीएफ को सौंप दी थी। सभी शिक्षकों का शैक्षिक रिकॉर्ड सहित अन्य डेटा मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करने का आदेश दिया गया था। इसके बाद से पूरे प्रदेश स्तर पर फजीवाड़ा का खुलासा होने लगा। पिछले चार साल में ही जनपद से 54 शिक्षकों को सत्यापन के बाद फर्जी मिले प्रमाण पत्रों के आधार पर सेवा से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है। अन्य संदिग्ध शिक्षकों के खिलाफ जांच चल रही है।
इन जिलों के बीएसए से भी मांगी गई है सूची
फजीवाड़े के संबंध में देवरिया के अलावा सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, बस्ती, महाराजगंज, कुशीनगर, बुलंदशहर, सीतापुर, बरेली, हरदोई, बागपत, अयोध्या, आगरा, एटा, कासगंज, आजमगढ़, बलिया, चंदौली, गोंडा, बलरामपुर, भदोही, प्रयागराज, मऊ, गाजीपुर, श्रावस्ती, झांसी, ललितपुर, कानपुर देहात, संभल, पीलीभीत, अलीगढ़, उन्नाव, कन्नौज, सुल्तानपुर, जौनपुर।
बीएसए संतोष कुमार राय ने बताया कि जनपद में कुछ शिक्षकों के नाम रिकॉर्ड में अलग-अलग हैं। ऐसे में जिन शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच हो चुकी है, उनकी पुन: शिकायत की गई तो इसकी जांच आख्या भेज दी गई है। एजेंसी की ओर से जो भी सूचनाएं मांगी जाएंगी, उसे उपलब्ध कराया जाएगा।