गुलाब ने बताया कि बदलते जमाने के साथ बाजार का स्वरूप भी बदला है। ऑनलाइन मार्केट का चलन बढ़ा है। प्रदेश सरकार द्वारा ई-कामर्स प्लेटफार्म ओडीओपी मार्ट का भी टेराकोटा शिल्पकारों को फायदा मिलेगा।
विदेश तक मिली है शिल्प को पहचान
शिल्पकारों की उंगलियां जब चाक पर चढ़ी मिट्टी से खेलती हैं तो कई प्रकार की अद्भुत कलाकृतियां जन्म लेती हैं। इनके हुनर का जादू लखनऊ के आंबेडकर पार्क से लेकर राष्ट्रपति भवन के मुगल गार्डेन तक छाया हुआ है। टेराकोटा की मूर्तियां देश के अनेक संग्रहालयों में धरोहर के रूप में संरक्षित हैं। जापान, अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, फ्रांस, तुर्की सहित कई देशों के संग्रहालयों में भी रखी गईं हैं।
देश-विदेश में हुनर दिखाने के साथ कई पुरस्कार पा चुके हैं गुलाब
- गुलाब चंद्र प्रजापति 1982 में बोरे में मिट्टी ले जाकर ब्रिटेन के बर्किंघम पैलेस में हुनर दिखा चुके हैं।
- साल 1985 में आस्ट्रेलिया और साल 1987 में हालैंड में अपनी कला का लोहा मनवा चुके हैं।
- साल 1994 में गणतंत्र दिवस की परेड में औरंगाबाद की टेराकोटा प्रदर्शनी को शामिल किया गया था।
- साल 1986 में लक्ष्मी प्रजापति ढाका में आयोजित एशियन रीजनल आर्टीजियन वर्कशाप में कलाकृतियों का प्रदर्शन कर चुके हैं।
- पूर्व राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के हाथों गुलाब चंद्र प्रजापति को पुरस्कार मिल चुका है।