ग्रामीण बताते हैं कि घटना के तीसरे दिन 14 जनवरी की रात में पुलिस व पीएसी ने गांव में घुसकर बर्बरता की थी। अगले दिन मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में छा गया। प्रदेश सरकार के मंत्री रहे मोहन सिंह ने भी इस घटना को लेकर विधानसभा में अपनी सरकार को खरी-खोटी सुनाई। केंद्र सरकार ने प्रदेश की बनारसी दास की सरकार को बर्खास्त कर दिया।
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी स्वयं नरायनपुर गांव में पीड़ितों का हाल और स्थिति का जायजा लेने पहुंची। पीड़ित परिवार की दयनीय स्थिति पर उन्होंने गहरा दुख तो जताया ही, सड़क हादसे में मृत बुजुर्ग की छह साल की पोती सोनकेशिया को गोद में उठाकर पुचकारा और उसके जीवन निर्वाह का इंतजाम खुद करने की घोषणा की।
घटना के कुछ दिन तक तो सोनकेशिया पर सभी का प्यार उमड़ता रहा लेकिन बाद में वह लोगों के सहारे छोड़ दी गई। कुछ दिन बाद उसकी देखभाल फूफा करने लगे। इसी बीच सोनकेशिया के भाई जयप्रकाश की पोखरे में डूबने से मौत हो गई। फूफा ने भी पालन-पोषण से हाथ खींच लिया तो सोनकेशिया को बकरी पालकर और लोगों की दया पर जीवन यापन करना पड़ा।
सोनकेशिया की शादी गांव के लोगों ने रामाशीष से करा दी। सोनकेशिया की आर्थिक स्थिति अब भी पहले जैसी ही है। आज यह महिला अपने परिवार के साथ खपरैल के मकान रहती है।
ग्राम प्रधान भोला प्रसाद ने बताया कि उसे इंदिरा आवास, शौचालय व राशन कार्ड की सुविधा दी गई है। इसके अलावा ग्राम पंचायत ने उसके दरवाजे तक इंटरलॉकिंग करा दी है। एक बच्ची की शादी हो गई है। तीन बच्चों के साथ महिला खेती करके जीवन यापन करती है।
गांव के लोग बताते हैं कि इस घटना के बाद गांव में एक माह के अंदर संजय गांधी ने भी तीन बार दौरा किया था। लेकिन राजनैतिक हित पूरा होने के बाद आज तक किसी ने इस परिवार की सुध नहीं ली।