तकरीबन 35 से 40 साल पहले एक ऐसी रेल लाइन थी, जिस पर ट्रेन से सफर में यात्रियों को एक ऐसी अद्भुत रोमांच का अवसर मिलता था जो अब यादों में ही तरोताजा है। यात्री ट्रेन से उतरकर गंगा नदी को स्टीमर में बैठकर पार करते थे और फिर ट्रेन में बैठते थे।
यह यात्रा एक किलोमीटर की होती थी। खास बात यह है कि यात्रियों को स्टीमर में भी उसी क्लास में बैठाया जाता था, जिस क्लास में उनका ट्रेन में आरक्षण होता था।
पूर्वोत्तर रेलवे में गोरखपुर से कोलकाता और पटना जाने के लिए यात्रियों को हाजीपुर स्टेशन के पास गंगा नदी के पहलेजा घाट के पहले ट्रेन से उतार दिया जाता था। उसके बाद स्टीमर (फेरी) में बैठाया जाता था।