नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने गिनाईं अपनी प्राथमिकताएं। बोले- तीन मल्टीलेवल पार्किंग बनाकर जाम की समस्या से निजात दिलाई जाएगी। 100 करोड़ की जमीन अतिक्रमण मुक्त कराई, नगर निगम को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम।
अपनी कार्यप्रणाली से गोरखपुर नगर निगम से संबंधित दुरूह कामों को आसान बनाने वाले नगर आयुक्त अविनाश सिंह भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करने के पक्षधर हैं। उनका कहना है कि वह जनता के लिए सहज-सुलभ हैं। अगर नगर निगम का कोई अधिकारी या फिर कर्मचारी भ्रष्टाचार की बात करता है तो सीधे मेरे पास आएं। प्रभावी कार्रवाई होगी। हर काम आसानी से होगा। किसी टेबल पर फाइल नहीं रुकेगी। ऐसी व्यवस्था बनाई गई है। प्राथमिकता शहर को जलभराव से निजात दिलाना है। इस दिशा में काम किया जा रहा है। नगर निगम को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम भी छेड़ी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप अब तक 100 करोड़ रुपये की जमीन भूमाफिया के चंगुल से मुक्त कराई गई है। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। जनता की सहूलियत पर काम किया जा रहा है। अमर उजाला के वरिष्ठ संवाददाता राजीव रंजन ने नगर आयुक्त से शहर के विकास, समस्याओं से निजात और जनता की सुविधा, सहूलियत पर विस्तार से बात की है। पेश है प्रमुख अंश-
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सवाल: शहर की सबसे बड़ी समस्या किसे मानते हैं, निजात दिलाने की कोई योजना आपके पास है?
जवाब- आप जानते हैं, यह शहर मुख्यमंत्री का है। विकास की ढेरों परियोजनाओं पर काम चल रहा है। सीवरेज सिस्टम भी बनाया जा रहा है। सड़कें अच्छी हुईं हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हुआ है। अब तक जो समझ सका हूं, जलभराव सबसे बड़ी समस्या है। इससे निजात दिलाने का प्रयास चल रहा है। जीडीए के सहयोग से जलनिकासी की स्थायी योजना बनाई जा रही है। जिओनी कंपनी के इंजीनियर एक-एक क्षेत्र का सर्वे कर रहे हैं। जल्द ही डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) सामने होगी। इसके बाद एनेक्सी भवन सभागार में नगर निगम के सारे पार्षदों व विशेषज्ञों के सामने डीपीआर का पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन कराया जाएगा। सभी की राय ली जाएगी। तब डीपीआर फाइनल होगी। फौरी राहत के लिए दिल्ली व कानपुर सहित अन्य शहरों से बड़ी क्षमता के पंपिंग सेट मंगाए गए हैं। सभी 70 वार्ड से पानी निकालने का काम चल रहा है। 100 से ज्यादा पंपिंग सेट लगाए गए हैं। रेग्युलेटर की मदद से भी पानी बाहर किया जा रहा है।
सवाल: शहर की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त बनाने में नगर निगम की क्या भूमिका रहेगी?
जवाब- पार्किंग शहर की दूसरी बड़ी समस्या है। जो जहां चाहे, गाड़ी खड़ी करके चला जाता है। इससे जाम लगता है। पार्किंग की समस्या दूर होते ही सब कुछ ठीक हो जाएगा। जीडीए की तरफ से मल्टीलेवल पार्किंग बनवाई जा रही है। नगर निगम भी तीन मल्टीलेवल पार्किंग बनवाने जा रहा है। रोडवेज बस स्टेशन के पास, घंटाघर में बंधु सिंह पार्क के पास और गोरखपुर रेलवे स्टेशन से काली मंदिर के बीच गोलघर में मल्टीलेवल पार्किंग बनाने की डीपीआर तैयार है। 50.25 करोड़ की लागत से शहर के 21 चौराहों पर इंटेलीजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) लागू किया जा रहा है। 30 अक्तूबर तक शहर के 9 चौराहों पर आईटीएमएस काम करना शुरू कर देगा। इसके लिए शासन से 12.5 करोड रुपये मिल चुके हैं।
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सवाल: आवास या प्लॉटों के नामांतरण में गड़बड़ी की बड़ी शिकायतें मिलती हैं ?
जवाब- देखिए, अब ऐसा नहीं है। नामांतरण की प्रक्रिया बिल्कुल आसान बना दी गई है। निर्धारित समयसीमा के अंदर हर आवेदन पत्र का निस्तारण हो रहा है। इसके लिए विशेष शिविर भी लगाए जा रहे हैं। आगे कोई ऐसी शिकायत न आए, ऐसी व्यवस्था बनाई गई है।
सवाल: शहरवासियों को कुछ नई सुविधाएं देंगे क्या?
नगर आयुक्त अविनाश सिंह।
- फोटो : अमर उजाला।
जवाब- निश्चित तौर पर सुविधाएं दी जाएंगी। यही प्राथमिकता है। मिशन शक्ति के तहत बड़े बाजार व व्यावसायिक कांप्लेक्स के आसपास पिंक टॉयलेट बनाए जाएंगे। इसका सबसे ज्यादा लाभ महिलाओं को मिलेगा। वाईफाई सुविधा भी दी जाएगी। रेलवे बस स्टेशन, गोरखपुर यूनिवर्सिटी, रामगढ़ताल, गोलघर, मोहद्दीपुर, गोरखनाथ मंदिर और मेडिकल कॉलेज के आसपास वाईफाई सुविधा मुहैया कराई जाएगी। इस सिलसिले में बीएसएनएल व रेलटेल से बात हो रही है। 300 मीटर के दायरे में वाईफाई की सुविधा मिलेगी। नगर निगम परिसर स्थित तालाब में म्यूजिकल फाउंटेन का भी आनंद उठाया जा सकेगा। ओपेन फूड कोर्ट भी बनाया जा रहा है। ओपेन जिम बनेगी। पराग डेरी से टाइअप करके शहर में पहला मिल्क एटीएम बूथ बनाया जाएगा। इसे नगर निगम परिसर में स्थापित करने की योजना है। शहर के अल्प विकसित इलाकों की बेहतरी के लिए योजना बन गई है। हुडको से नगर निगम को कम ब्याज पर लोन मिलेगा। प्रयास है कि सफाई कर्मियों को छत मुहैया करा दी जाए।
सवाल: नगर निगम की आय कम है। इसका सीधा असर विकास पर पड़ता है ?
जवाब- आप ही बताइए, आय बढ़ाने के अलावा दूसरा रास्ता तो है नहीं। हमारा सपना गोरखपुर नगर निगम को आत्मनिर्भर बनाना है। अब तक 100 करोड़ रुपये कीमत की जमीनें भू-माफिया के चंगुल से छुड़ाई जा चुकी हैं। इन जमीनों पर आवासीय इमारतें व व्यावसायिक कांप्लेक्स बनाए जाएंगे। प्लॉट काटकर बेचे जाएंगे। 32 नए गांव नगर निगम क्षेत्र से जुड़े हैं। इससे संसाधन मजबूत होगा। इन क्षेत्रों में विकास की योजना बना ली गई है। बजट का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। स्वीकृति मिलते ही सड़क व नाली का काम कराया जाएगा। लखनऊ और गाजियाबाद नगर निगम की तरह ही गोरखपुर नगर निगम भी बांड जारी करेगा। इससे आय बढ़ेगी। लखनऊ की एक फर्म और यातायात विभाग के साथ थ्री पार्टी एग्रीमेंट हुआ है। नगर निगम कुछ क्रेन खरीदने जा रहा है। क्रेन किराए पर यातायात विभाग को दी जाएंगी। इससे हर महीने की आय सुनिश्चित होगी। गलत जगह पार्क होने वाली गाड़ियां उठाकर यातायात कार्यालय ले जाई जा सकेंगी।
सवाल: नगर निगम की संपत्तियों पर अब भी अवैध कब्जे है ?
जवाब- शहर में 7500 से भी ज्यादा संपत्तियां हैं। कुछ संपत्तियों पर अवैध कब्जे भी हैं। एंटी भू माफिया सेल लगातार काम कर रही है। अब तक 6.16 एकड़ जमीन कब्जा मुक्त कराई गई है। यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। अवैध कब्जेदारों के साथ सख्ती बरती जाएगी। इसी लिहाज से इंफोर्समेंट टीम में 20 और पूर्व सैनिकों की भर्ती की जा रही है। ऐसा हुआ तो बिना पुलिस के ही कब्जे हटा सकेंगे। अवैध कब्जेदारों को किसी तरह की राहत न मिले, इस लिहाज से अधिवक्ताओं का पैनल बनाया गया है। अधिवक्ताओं का पैनल हर मामले में प्रभावी पैरवी करेगा।
सवाल: बारिश में कई सड़कें खराब हो गईं। नालियां चोक हैं ?
जवाब- सड़क निर्माण का काम जल्द शुरू होगा। हरिहर प्रसाद दुबे मार्ग को सीसी बनाया जा रहा है। यह सड़क बहुत अच्छी हो जाएगी। शहर की जो भी सड़कें टूटी हैं, उन्हें जल्द बनाया जाएगा। इसकी योजना बन चुकी है। बारिश थमते ही काम शुरू हो जाएगा। दिसंबर से पहले सभी सड़कें चकाचक होंगी। सड़क के दोनों तरफ नालियां बनाई जाएंगी। इससे पानी आसानी से निकल जाएगा। जलभराव की समस्या नहीं होगी। मुख्य बाजारों के साथ ही मोहल्लों की स्ट्रीट लाइटें और दुरुस्त कराई जाएंगी।
सवाल: कोरोना संकट के बीच कामकाज संभालना व चुनौतियों से निपटना आपके लिए कितना कठिन रहा?
जवाब- जब कामकाज संभाला था, तब कोरोना की दूसरी लहर चल रही थी। सबसे बड़ी चुनौती संक्रमण को तोड़ना था। यह वृहद सैनिटाइजेशन अभियान से ही संभव था। लिहाजा, पूरी टीम के साथ सैनिटाइजेशन में जुट गया। हर बाजार, क्षेत्र व मोहल्ले में गया। इसका अच्छा नतीजा भी आया। जल्द ही कोरोना संक्रमण की चेन टूट गई। नगर निगम के अधिकारी व कर्मचारियों के हौसले को सलाम करता हूं। जब सब घरों में थे, तब नगर निगम कर्मी शहर को साफ-सुथरा बनाने में लगे थे। जिन लोगों की मौत हुई, वह दुखद थी। अंत्येष्टि स्थल पर किसी तरह की दिक्कत न आए, ऐसी व्यवस्था बनाई गई थी।
सवाल: शहर के विकास के लिए आपने कोई खास योजना बनाई है क्या?
जवाब- शहरी विकास का काम बहुत कराया है। इससे पहले कानपुर और प्रयागराज का नगर आयुक्त रह चुका हूं। सिटी डेवलपमेंट प्लान मेरे लिए नया नहीं है। मुख्यमंत्री ने गोरखपुर शहर को चमकाने व जनता को सहूलियत देने की जो जिम्मेदारी दी है, उसपर खरा उतरना है। कुछ समय लग रहा है, लेकिन सारी व्यवस्थाएं ठीक होंगी।