चार साल के भीतर दूसरी बार गोरखपुर आए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय का लोकार्पण किया। इसके पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भूमि पूजन करके भटहट के पिपरी में स्थित प्रदेश के पहले महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी।
आयुष विश्वविद्यालय के शिलान्यास समारोह के दौरान जनसमूह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि गोरखपुर में महायोगी गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना से ‘आयुष’ पद्धतियों की शिक्षा एवं लोकप्रियता को बढ़ावा मिलेगा। भगवान धन्वंतरि को जहां आयुर्वेद का जनक माना जाता है, वहीं ऋषि अगस्त्य को सिद्ध चिकित्सा के संस्थापक के रूप में जाना जाता है।
आदिवासी समाज में जड़ी-बूटियों और वन औषधियों के ज्ञान की समृद्ध परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में देश में आयुष चिकित्सा पद्धतियों की लोकप्रियता में बहुत बढ़ोतरी हुई है।
देश में सिद्ध चिकित्सा पद्धति का विकास नाथों-सिद्धों ने किया
राष्ट्रपति ने कहा कि देश में सिद्ध चिकित्सा पद्धति का विकास नाथों एवं सिद्धों द्वारा किया गया। आज के समय में यह पद्धति, दक्षिण भारत में अधिक लोकप्रिय है। खनिजों और धातुओं को औषधि रूप में तैयार करके, इमरजेंसी मेडिसिन के रूप में इनके प्रयोग के प्रवर्तकों में बाबा गोरखनाथ प्रमुख रहे हैं। ऐसे में आयुष विश्वविद्यालय का नाम महायोगी गुरु गोरखनाथ रखा जाना पूरी तरह से सही है।
योग से आरोग्य के साथ मिलती है सकारात्मक ऊर्जा : कोविंद
प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय के आधारशिला समारोह में राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि ऋग्वेद के समय से योग का जुड़ाव भारत के जन-मानस के साथ रहा है। सिंधु घाटी सभ्यता में मिले पुरावशेषों से भी प्रमाणित हुआ है कि योग हमारी जीवन शैली का अंग रहा है। वर्तमान में योग की लोकप्रियता एवं महत्ता सभी को मालूम है। योग को जीवन में उतार लेने पर व्यक्ति आरोग्य के साथ-साथ सकारात्मक ऊर्जा से भर उठता है। योग मानसिक, शारीरिक व भावनात्मक तौर पर मजबूत बनता है। तनाव और चिंता से भरे आधुनिक समय में मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य का मार्ग योग से उपलब्ध होता है।
राष्ट्रपति भवन परिसर में विकसित हो रहा आरोग्य वन
राष्ट्रपति ने कहा कि समेकित चिकित्सा पद्धति का विचार पूरी दुनिया में मान्य हो रहा है। अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियां एक दूसरे की पूरक प्रणाली के रूप में लोगों को आरोग्य प्रदान करने में सहायक हो रही हैं। राष्ट्रपति भवन परिसर में एलोपैथिक चिकित्सा क्लीनिक के साथ-साथ आयुष आरोग्य केंद्र की सुविधा भी उपलब्ध है। आरोग्य वन विकसित करने का काम शुरू किया गया है।
प्राकृतिक चिकित्सा के जोरदार पक्षधर थे महात्मा गांधी: राष्ट्रपति
राष्ट्रपति कोविंद ने मंच से महात्मा गांधी को याद किया और कहा कि भारतीय चिकित्सा पद्धति, विशेष तौर पर प्राकृतिक चिकित्सा की बात हो, तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जिक्र होना स्वाभाविक है। वे प्राकृतिक चिकित्सा के प्रबल पक्षधर थे और कहा करते थे कि शारीरिक उपचार के साधन हमारी प्रकृति में ही मौजूद हैं। वे इस बात से बहुत व्यथित रहते थे कि आधुनिक शिक्षा का संबंध हमारे दिन-प्रतिदिन के जीवन के साथ नहीं है। विद्यार्थियों को अपने गांव और खेतों के बारे में ज्ञान नहीं होता।
सभी को स्वस्थ रखना आवश्यक
राष्ट्रपति ने कहा कि भारतवर्ष में वैदिक काल से ही ‘आरोग्य’ पर विशेष बल दिया जाता रहा है। वेदों, उपनिषदों, पुराणों और अन्य प्राचीन ग्रंथों में आरोग्य की महत्ता का वर्णन है। कहा भी गया है कि शरीर ही समस्त कर्तव्यों को पूरा करने का प्रथम साधन है, इसलिए शरीर को स्वस्थ रखना बेहद आवश्यक है।
भगवान इंद्रदेव भी अपना आशीर्वाद देने हम सबके बीच आ गए : राष्ट्रपति
आयुष विश्वविद्यालय के शिलान्यास के दौरान अचानक बारिश शुरू हो गई तो राष्ट्रपति ने अपने संबोधन की शुरुआत में ही इसका स्वागत कुछ अलग ढंग से किया। भगवान इंद्रदेव भी अपना आशीर्वाद देने हम सबके बीच आ गए हैं। भारतीय शास्त्रों में मान्यता है कि कोई शुभ कार्य संपन्न हो रहा हो और उस दौरान यदि आकाश से पानी की बूंदे गिरने लगें तो कहा जाता है कि यह शुभ से अद्यतम शुभम हो गया है। उन्होंने कहा कि बारिश शाम को भी हो सकती थी मगर आयुष विश्वविद्यालय के प्रति जनता के समर्पण ने इंद्रदेव को बाध्य कर दिया कि वे इस कार्यक्रम के संपन्न होने के दौरान ही आशीर्वाद देने आ जाएं।
शंख और घंट-घड़ियाल की ध्वनि के बीच महामहिम का मंच पर स्वागत
भूमि पूजन और आयुष विश्वविद्यालय की आधारशिला रखने के बाद जैसे ही राष्ट्रपति मंच की तरफ बढ़े शंख और घंट-घड़ियाल की ध्वनि के बीच उनका जोरदार स्वागत किया गया। मंच पर पहुंचने पर और जाने से पहले राष्ट्रगान हुआ। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने पुष्प देकर राष्ट्र की प्रथम महिला सविता कोविंद तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का अभिवादन किया।