पूर्वोत्तर रेलवे 1982 से लेकर 1942 तक बंगाल एंड नार्थ ईस्टर्न रेलवे था और महाप्रबंधक की जगह सबसे बड़ा अधिकारी एजेंट्स होते थे। रेलवे के दस्तावेजों के मुताबिक बंगाल एंड नार्थ ईस्टर्न रेलवे के पहले एजेंट्स का नाम था डब्ल्यू सी फर्निवाल। उनका कार्यकाल 1982 से 1983 तक यानी एक वर्ष था।
इसके बाद 8 और एजेंट्स तैनात हुए। 1943 में यह रेलवे अउध एंड तिरहुत रेलवे के अधीन हो गया और जे रेकनी इजात को एजेंट्स बनाया गया।
इस रेलवे में भी सात एजेंटों ने कमान संभाली। 1952 में जब फिर जोन का बंटवारा किया गया तो पूर्वोत्तर रेलवे अस्तित्व में आया। पहले महाप्रबंधक बनाये गए जी पांडेय और उनका कार्यकाल भी एक साल ही रहा।