उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही हत्याएं, बच्चियों के साथ दुष्कर्म, लूट की घटनाएं एवं बलिया में जयप्रकाश पाल की निर्मम हत्या एवं खराब होती कानून व्यवस्था को लेकर राज्यपाल को ज्ञापन भिजवाने जा रहे सपाइयों की कई जगह पुलिस से तीखी नोकझोंक हुई।
सपा के बेतियाहाता कार्यालय से लेकर कलेक्ट्रेट के बीच पुलिस ने उन्हें कई स्थान पर रोकने की कोशिश की, लेकिन सपाई किसी तरह कलेक्ट्रेट पहुंच गए और डीएम के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजा और संवैधानिक दायित्व निभाते हुए उचित निर्णय लेने की मांग की।
सोमवार को सपा जिलाध्यक्ष नगीना प्रसाद साहनी के नेतृत्व में राज्यपाल को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया कि प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति अत्यंत गंभीर है। हत्या, लूट, अपहरण, दुष्कर्म की घटनाएं रोज ही घट रही हैं और प्रदेश की भाजपा सरकार इस पर नियंत्रण पाने में पूरी तरह से विफल है। प्रदेश में बेलगाम अपराध और बेखौफ अपराधी सत्ता संरक्षण में पल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सर्वाधिक असुरक्षित महिलाएं एवं बच्चियां है। महिलाओं के साथ 2017 में 56011, वर्ष 2018 में 59445, वर्ष 2019 में 59853 अपराध हुए हैं। राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार पूरे भारत में अपराधों के सापेक्ष सबसे अधिक 14.3 प्रतिशत अपराध संख्या उत्तर प्रदेश में हुई है।
ध्वस्त कानून व्यवस्था का आलम तो यह है कि बलिया में 15 अक्तूबर 2020 को दिनदहाड़े राशन दुकान के आवंटन की पंचायत में हुए विवाद में भाजपा नेता ने एक युवक को गोली मार दी। इस समय एसडीएम और सीओ भी मौजूद थे। पुलिस की पकड़ में आने के बाद भी आरोपी को भाग जाने दिया गया।
ज्ञापन देने के दौरान निवर्तमान महानगर अध्यक्ष जियाउल इस्लाम, अखिलेश यादव, अवधेश यादव, रजनीश यादव, यशपाल रावत, विजय बहादुर यादव ,अमरेन्द्र निषाद, रुपावती बेलदार, मनुरोजन यादव, मिर्जा कदीर बेग, जयप्रकाश यादव, मुन्नी लाल यादव, जितेंद्र सिंह, दूधनाथ मौर्या, अमित सिंह सैथवार ,सिंहासन यादव, संजय पहलवान, कृष्ण कुमार त्रिपाठी, हाजी शकील अंसारी, प्रमोद यादव, राघवेंद्र तिवारी राजू, कीर्तिनिधि पांडे समेत काफी संख्या में नेता और कार्यकर्ता शामिल रहे।