चैतन्य हॉस्पिटल, समय- सुबह 11.45 बजे, स्थान- दाउदपुर
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दाउदपुर स्थित चैतन्य हॉस्पिटल का बड़ा गेट पूरी तरह बंद था। बाहर धक्कामुक्की करके मरीज छोटे गेट के रास्ते अंदर जाने का रास्ता तलाश रहे थे। इस बीच अंदर से एक व्यक्ति पीपीई किट पहने आया और लोगों को एक-एक करके अंदर आने की सलाह दी। लेकिन लोग उसकी बातों को नजर अंदाज करके एक-दूसरे से सटकर आगे जाने की कोशिश करते रहे।
सोशल डिस्टेंसिंग पूरी तरह से तार-तार होती दिखी। अंदर पीपीई किट पहना व्यक्ति थर्मल स्कैनर से अंदर जाने वालों की जांच करता मिला।
रचित हॉस्पिटल, समय- दोपहर 12.05 बजे, स्थान- गोरखपुर-लखनऊ राजमार्ग।
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गोरखपुर-लखनऊ राजमार्ग पर सिथत रचित हॉस्पिटल का बड़ा गेट बंद था लेकिन गेट के बाहर मरीजों की भीड़ ऐसी थी मानों कोरोना का किसी को कोई डर ही न हो। मरीज व उनके तीमारदार सामान्य दिनों की तरह इलाज कराने आए। सोशल डिस्टेंसिंग की खुलेआम धज्जियां उड़ीं। सब एक दूसरे से सटकर खड़े मिले। ज्यादातर के चेहरे पर मास्क नहीं दिखे। गेट पर खड़ा जो स्वास्थ्य कर्मी थर्मल स्कैनिंग कर रहा था, उसके पास पीपीई किट नहीं थी। मास्क लगाकर ही स्कैनिंग करता मिला। बाहर से जो स्थिति देखने को मिली, उसके मुताबिक कोविड-19 के जरूरी मानकों का पालन नहीं हो रहा है।
पल्स हॉस्पिटल, समय- दोपहर 12.13 बजे, स्थान- छात्रसंघ चौराहा स्थित।
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छात्रसंघ चौराहा स्थित पल्स हॉस्पिटल का छोटा सा गेट खुला था। बाहर खड़े लोग इसी गेट से अंदर जाने का प्रयास कर रहे थे। सोशल डिस्टेंसिंग दरकिनार कर लोग निर्धारित दूरी से ज्यादा करीब खड़े मिले। अंदर जाने के दौरान रोकटोक पर गार्ड से कहासुनी का सिलसिला चलता रहा। अस्पताल के बाहर इलाज कराने वालों की भीड़ ऐसी थी कि लग नहीं रहा था कि लोग इमरजेंसी में इलाज कराने आए हैं। ज्यादातर के चेहरे पर मास्क नहीं दिखा।
रचित हॉस्पिटल डॉ विनय राय ने बताया कि अस्पताल के गेट पर तीन स्टाफ खड़ा रहता है। इमरजेंसी ओपीडी में केवल मरीज को आने दिया जा रहा है। इनडोर मरीजों के लिए पास जारी किया गया है। अस्पताल के अंदर सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा पालन किया जा रहा है। हॉस्पिटल के बाहर भी मरीजों के तीमारदारों को समझाया जाता है।
पल्स हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. राकेश दूबे ने बताया कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सुनिश्चित करने के लिए अस्पताल में 50 प्रतिशत बेड कम कर दिए गए हैं। गेट पर गार्ड भी लगाया है। केवल मरीजों को ही इंट्री दी जा रही है। इसके बाद भी लोग गार्ड से लड़ जा रहे हैं। हॉस्पिटल के अंदर पूरी तरह से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो रहा है।
चैतन्य हॉस्टिपल के डॉ. सीपी गुप्ता ने बताया कि हॉस्पिटल में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन पूरी तरह से कराया जा रहा है। अंदर केवल मरीजों को आने दिया जा रहा है। अंदर आने वालों की भी थर्मल स्कैनिंग कराई जा रही है। इसका रिकॉर्ड भी मेनटेन किया जा रहा है।
गोरखपुर सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बाताया कि कोरोना से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग बेहद जरूरी है। निजी अस्पतालों को इमरजेंसी इलाज की अनुमति इसी शर्त पर दी गई है कि वे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करेंगे। अस्पताल के अंदर और बाहर की यह जिम्मेदारी प्रबंधकों को उठानी होगी। स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार निरीक्षण कर रही है। अगर लापरवाही मिली तो कार्रवाई की जाएगी।
- अस्पताल में बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम होना जरूरी।
- कोविड-19 के तहत हैंड सैनिटाइजर, मास्क और थर्मल स्कैनिंग की व्यवस्था अनिवार्य।
- अस्पताल के अंदर व बाहर सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन।