पर्यावरणविद कुणाल ने बताया कि सांपों की तस्करी का रैकेट सक्रिय है। मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच इन्हें ऑपरेट किया जाता है। तस्कर दो मुंहे सांप लेकर उन्हें उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों के अलावा हरियाणा पहुंचाते हैं।
यहां से इन सांपों को जिंदा या फिर इनके शरीर के अलग-अलग हिस्से अरब देशों को भेजे जाते हैं। इन सांपों की बिक्री वजन के हिसाब से होती है। यदि यह दो किलो से अधिक का होता है, तो इसकी कीमत लाखों रुपयों की होगी।
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बरसात में सांपों के आबादी क्षेत्र में आने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। शहर में रेलवे लाइन के आसपास के इलाकों में इनके मिलने की सूचनाएं बढ़ जाती हैं। इसकी जानकारी तस्करों को भी है। डीएफओ विकास यादव ने बताया कि पकड़े गए तस्कर की पहचान कानपुर के ग्रामीण इलाके की हुई है। ऐसे में ये तय है कि इन्हें सांप को पकड़ने का असली समय और उनके तस्करी के रैकेट की पूरी जानकारी है।
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ये सावधानियां जरूरी
घर के आसपास साफ-सफाई बेहद जरूरी है। खाली प्लाॅट की झाड़ियों को साफ करवाएं। सांप को पकड़ने व मारने की कोशिश न करें। घर के बाहर ब्लीचिंग व चूना पाउडर डाले। फर्श व बाहर बरामदे में फिनायल से पोछा लगाएं। सर्पदंश की आशंका पर सीधा अस्पताल जाएं। झाड़-फूंक के चक्कर में समय गंवाना गलत है।