तस्करों ने भारतीय सीमा में स्थित गांवों में डंपिंग स्टेशन बना रखा है। सूत्रों के अनुसार, तस्कर नेपाल राष्ट्र से कैरियर के माध्यम से विदेशी मटर की तस्करी कर सीमावर्ती गांवों में स्टोर कर लेते हैं। उसके बाद में पिकअप से आसपास के जिले सहित प्रदेश के बाजारों में आसानी से विदेशी मटर की खेप को पहुंचाने में सफल हो जाते है।
महीने में 35 से 40 केस आना बयां करती हैं तस्करी की कहानी
सूत्र बताते हैं कि कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने की कोशिश के चलते विदेशी मटर के तस्कर भारतवासियों की सेहत के साथ देश की सुरक्षा को भी खतरे में डाल रहे हैं। कोरोना के दौर में भारत-नेपाल बॉर्डर सील होने के बावजूद भी भारतीय क्षेत्र के कई जगहों से बड़ी मात्रा में विदेशी मटर की बड़ी खेप जब्त होना। एक महीने में करीबन 35 से 40 केस कस्टम विभाग में दर्ज होना इस बात का साफ संकेत है कि तस्कर सक्रिय हैं।
पुलिस अधीक्षक प्रदीप गुप्ता ने कहा कि पुलिस को सतर्क रहने का निर्देश है। सीमावर्ती क्षेत्र में विशेष नजर रखी जाती है। दायित्व के प्रति लापरवाही किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए हर संभव कार्रवाई की जा रही है।