इसी बीच एक परिचित ने मेडिकल चौकी पुलिस की मदद से महराजगंज से गोरखपुर जाने वाली गाड़ियों को चेक करवाने लगा। दोपहर दो बजे रोडवेज बस में युवक किशोरी के साथ पकड़ा गया। किशोरी युवक से शादी की जिद पर अड़ी रही। दोनों के परिजन मेडिकल चौकी पुलिस पहुंचे। चौकी पुलिस ने लिखा पढ़ी कर सुपुर्द कर दिया गया।
अभिभावक को ध्यान देने की जरूरत
परिवार ही बच्चों की पहली पाठशाला होती है। अब लालन-पालन में पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव बढ़ा है। कई अभिभावक ओपेन सोसायटी की बात बेहिचक करते हैं। कम उम्र की संतान इनके सही मायने समझे बिना, ऐसी सोसायटी का हिस्सा बनने की कोशिश करती है। फिल्में, टीवी सीरियल भी प्यार को अलग तरह से परिभाषित करते हैं। युगल के साथ को आज की जरूरत की तरह पेश करते हैं। बेटा हो या बेटी, इन सारी चीजों का नकारात्मक प्रभाव उनके रहन-सहन, सोचने के ढंग पर पड़ता है। भटकाव की नौबत तक भी ले जाता है। -डॉ. श्वेता जॉनसन, मनोविज्ञान विभाग, सेंट एंड्रयूज कॉलेज
किशोरावस्था में ज्यादा समझ नहीं होती
अशिक्षा और अनुशासन की कमी की वजह से ऐसे मामले ज्यादा सामने आते हैं। किशोरावस्था में बच्चों को सही-गलत की ज्यादा समझ नहीं होती है। ऐसे में पूरी जिम्मेदारी अभिभावकों की होती है कि वे उन पर नजर रखें। उनकी हर गतिविधि का मूल्यांकन करें। बच्चों के व्यवहार में बदलाव आने पर अभिभावक को काउंसलिंग करनी चाहिए। मित्रवत व्यवहार रखते हुए उन्हें सही और गलत की पहचान करानी चाहिए। सुविधाएं देने में खराबी नहीं है, लेकिन ध्यान रखें कि उनका दुरुपयोग न हो। -दीपेंद्र मोहन सिंह, समाजशास्त्री, गोरखपुर विश्वविद्यालय
शादी के लिए कानून में उम्र तय
भारतीय कानून में शादी के लिए लड़के की उम्र 21 और लड़की की उम्र 18 साल तय है। जाहिर है कि प्रेम करने वाले लड़के और लड़की इस उम्र के होंगे तो वह शादी कर सकते हैं। लड़की नाबालिग है और उसके प्यार में पड़कर अगर कोई लड़का उससे शादी करे या शारीरिक संबंध बनाए तो अपहरण, दुष्कर्म के आरोप में जेल जाना तय है। बशर्ते, लड़की के घरवाले मामला पुलिस तक लेकर जाएं। -शंकर शरण त्रिपाठी, वरिष्ठ अधिवक्ता