फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'मैं प्यार करती हूं': 'पुलिस अंकल मुझे छोड़ दीजिए, उसी के साथ रहना है...' 16 साल की बेटी की बातें सुन सब दंग

Sun, 29 Oct 2023 08:50 AM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, गुलरिहा (गोरखपुर)

सार

Gorakhpur News: लड़की और लड़का दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते हैं। शनिवार की सुबह युवक किशोरी को बहला फुसलाकर दिल्ली ले जा रहा था। घर से लापता होने की जानकारी किशोरी के परिजनों को हुई तो तलाश शुरू कर दी।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पुलिस अंकल मुझे छोड़ दीजिए। मैं प्यार करती हूं और उसी के साथ रहना चाहती हूं....16 साल की बेटी के ये लफ्ज सुनकर मां-बाप ही नहीं वहां मौजूद हर कोई हैरान हो गया। उम्र का हवाला देकर समझाने की बेकार होती कोशिश के बाद किसी तरह वह घर जाने को राजी हुई। प्रेमी को भी परिजनों को बुलाकर सुपुर्द कर दिया गया।

विज्ञापन


जानकारी के मुताबिक, महराजगंज जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के एक युवक का प्रेम-प्रसंग दो किमी दूर एक गांव की किशोरी से तीन वर्षों से है। दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते हैं। शनिवार की सुबह युवक किशोरी को बहला फुसलाकर दिल्ली ले जा रहा था। घर से लापता होने की जानकारी किशोरी के परिजनों को हुई तो तलाश शुरू कर दी।

इसी बीच एक परिचित ने मेडिकल चौकी पुलिस की मदद से महराजगंज से गोरखपुर जाने वाली गाड़ियों को चेक करवाने लगा। दोपहर दो बजे रोडवेज बस में युवक किशोरी के साथ पकड़ा गया। किशोरी युवक से शादी की जिद पर अड़ी रही। दोनों के परिजन मेडिकल चौकी पुलिस पहुंचे। चौकी पुलिस ने लिखा पढ़ी कर सुपुर्द कर दिया गया।

अभिभावक को ध्यान देने की जरूरत
परिवार ही बच्चों की पहली पाठशाला होती है। अब लालन-पालन में पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव बढ़ा है। कई अभिभावक ओपेन सोसायटी की बात बेहिचक करते हैं। कम उम्र की संतान इनके सही मायने समझे बिना, ऐसी सोसायटी का हिस्सा बनने की कोशिश करती है। फिल्में, टीवी सीरियल भी प्यार को अलग तरह से परिभाषित करते हैं। युगल के साथ को आज की जरूरत की तरह पेश करते हैं। बेटा हो या बेटी, इन सारी चीजों का नकारात्मक प्रभाव उनके रहन-सहन, सोचने के ढंग पर पड़ता है। भटकाव की नौबत तक भी ले जाता है। -डॉ. श्वेता जॉनसन, मनोविज्ञान विभाग, सेंट एंड्रयूज कॉलेज

किशोरावस्था में ज्यादा समझ नहीं होती
अशिक्षा और अनुशासन की कमी की वजह से ऐसे मामले ज्यादा सामने आते हैं। किशोरावस्था में बच्चों को सही-गलत की ज्यादा समझ नहीं होती है। ऐसे में पूरी जिम्मेदारी अभिभावकों की होती है कि वे उन पर नजर रखें। उनकी हर गतिविधि का मूल्यांकन करें। बच्चों के व्यवहार में बदलाव आने पर अभिभावक को काउंसलिंग करनी चाहिए। मित्रवत व्यवहार रखते हुए उन्हें सही और गलत की पहचान करानी चाहिए। सुविधाएं देने में खराबी नहीं है, लेकिन ध्यान रखें कि उनका दुरुपयोग न हो। -दीपेंद्र मोहन सिंह, समाजशास्त्री, गोरखपुर विश्वविद्यालय
विज्ञापन

शादी के लिए कानून में उम्र तय
भारतीय कानून में शादी के लिए लड़के की उम्र 21 और लड़की की उम्र 18 साल तय है। जाहिर है कि प्रेम करने वाले लड़के और लड़की इस उम्र के होंगे तो वह शादी कर सकते हैं। लड़की नाबालिग है और उसके प्यार में पड़कर अगर कोई लड़का उससे शादी करे या शारीरिक संबंध बनाए तो अपहरण, दुष्कर्म के आरोप में जेल जाना तय है। बशर्ते, लड़की के घरवाले मामला पुलिस तक लेकर जाएं। -शंकर शरण त्रिपाठी, वरिष्ठ अधिवक्ता
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें