एनआईटी कैंपस में फंसे सिद्धार्थनगर जिले के बर्डपुर के रामनगर के रहने वाले आशीष दूबे बीटके प्रथम वर्ष के छात्र हैं। उन्होंने बताया कि चार दिन पहले कैंपस के आसपास के पहाड़ों पर बम और गोली की आवाज सुनाई दे रही थी। उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर भी किया जा रहा था। वीडियो में ऐसी भयानक हिंसा दिख रही थी, जिसे शब्दों में बता पाना कठिन है। अब स्थानीय स्तर पर इंटरनेट को बंद कर दिया गया है। दिल में डर इस कदर बैठ गया है कि हॉस्टल के कमरे से बाहर निकलने में भी घबराते हैं।
11 छात्रों ने किसी तरह छह हजार रुपये में आठ मई की मणिपुर से कोलकाता की फ्लाइट ली है। इनमें पांच छात्र बिहार के हैं। इनके अलावा बलिया का छात्र जीतेंद्र, ग्रेटर नोएडा का अभिषेक कुमार, सहारनपुर का अभिषेक और बनारस का तरप सिंह हैं।
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आशीष ने बताया कि खाने में केवल दाल, चावल सब्जी और दिन भर में पीने के लिए केवल दो लीटर पानी मिल रहा है। सेना की सुरक्षा में एयरपोर्ट पहुंचाने की जिम्मेदारी एनआईटी प्रशासन ने ली है। बताया कि पिता दिनेश कुमार दूबे से लगातार वार्ता हो रही है। वह लोग ज्यादा चिंतित है। क्योंकि, घर का अकेला हूं।
एनआईटी कैंपस में फंसे बस्ती के मुंडेरवा बाजार के रहने वाले नीरज प्रताप बीटेक प्रथम वर्ष के छात्र हैं। नीरज ने बताया कि शिक्षक हॉस्टल को खाली कर चुके हैं। हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है, लेकिन रजिस्टार ने साफ शब्दों में कह दिया है कि टिकट कराकर जल्द से जल्द घर चले जाओ। हालात इतनी जल्दी ठीक नहीं होंगे। अभी स्थिति और बिगड़ने वाली है। इसके बाद से दिल में और डर बैठ गया है।
कैंपस के आसपास पहाड़ी इलाके हैं, जहां पर शनिवार की देर रात रुक-रुककर धमाके की आवाज सुनाई दे रही थी। इसके बाद कैंपस की बिजली बंद कर दी गई थी। हर तरफ केवल सन्नाटा है। सिर्फ सेना के जवानों की गाड़ियों का आवाज ही सुनाई दे रही है। नीरज ने बताया कि टिकट 15 से 16 हजार मिल रहे हैं। इसकी वजह से अभी टिकट नहीं करवाया हूं। एक से दो दिनों के अंदर टिकट करवाकर घर आ जाऊंगा। इन सबके बीच पिता सुदामा प्रसाद और मां चिंता देवी से हर दिन बात हो रही है। लोग परेशान हैं।
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अंधेरे में बीत रही रात, पांच दिन से नहीं कर सके हैं स्नान
संतकबीरनगर के सांथा निवासी बीटेक तृतीय वर्ष के छात्र नीरज कुमार गुप्ता ने बताया कि यहां के हालात बदतर हैं। कैंपस में रहने के बावजूद काफी डर लग रहा है। दिन में तो किसी तरह सब अपने-अपने कमरे में रह रहे हैं, लेकिन खौफ की वजह से रात में सभी छात्र एक जगह इकट्ठा हो जाते हैं। बिजली भी बंद कर दी जाती है। खाना-पीना, स्नान सब मुश्किल हो गया है। पांच दिन हो गए हैं स्नान किए हुए। नाश्ता बंद कर दिया गया है। केवल दो समय का खाना मिल रहा है। वह भी केवल दाल-चावल। एनआईटी प्रशासन की ओर से जाने के लिए कहा जा रहा है। लेकिन यहां से निकलना मुश्किल है। उत्तरप्रदेश सरकार से निवेदन है कि जल्द से जल्द यहां से बाहर निकाले।
पानी की किल्लत, एक-एक दिन काटना मुश्किल
बस्ती के बभनान के रहने वाले बीटेक प्रथम वर्ष के छात्र सौरभ जायसवाल भी एनआईटी इंफाल में फंसे हैं। उन्होंने बताया कि एक-एक दिन काटना मुश्किल हो गया है। पीने का पानी भी नहीं मिल पा रहा है। नहा भी नहीं पा रहे हैं। एनआईटी प्रशासन भी हाथ खड़ा कर चुका है। वहीं, सीआरपीएफ की सुरक्षा के बावजूद बहुत डर लग रहा है। पांच दिन से इंटरनेट बंद है। कैंपस का वाई-फाई कभी कभी काम करता है। फोन से बात हो जा रही है। परिवार के सभी सदस्य बहुत परेशान हैं। फोन पर केवल एक ही बात कह रहे हैं कि किसी भी तरह से वहां से निकल आओ, लेकिन फ्लाइट की टिकट नहीं मिल पा रही है। यूपी और बिहार छोड़कर अन्य सभी प्रदेशों की सरकारें एनआईटी में फंसे विद्यार्थियों को निकाल चुकी हैं।