यहां लगभग 113 साल पहले जब अंग्रेजों द्वारा इस रूट पर मीटर गेज लाइन का निर्माण चल रहा था। उस समय अंग्रेज अधिकारियों ने फैसला ले लिया कि रेलवे लाइन इस मंदिर से होकर गुजरेगी। स्थानीय लोगों ने अंग्रेज अधिकारियों से रेलवे ट्रैक को मंदिर से थोड़ी दूर से ले जाने का आग्रह किया लेकिन उन्होंने बात नहीं मानी।
अंग्रेज अधिकारियों ने रेलवे लाइन वहीं से गुजारने का फरमान भी जारी कर दिया। अंग्रेज अफसरों के होश उस वक्त उड़ गए जब शाम को बिछाई गईं पटरियां सुबह अपने क्षतिग्रस्त मिलीं। पहले तो उन्हें इसके पीछे ग्रामीण का हाथ लगा लेकिन उन्होंने कई प्रयास किए और हर बार यहीं परिणाम सामने आया।
एक दिन रेलवे के तत्कालीन इंजीनयर को स्वप्न में माता के दर्शन हुए, उन्होंने उससे आदेश देते हुए कहा कि रेल की पटरियों को कही अन्य जगह बिछाओ अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। अंत में मां भवानी के आगे अंग्रेज अफसरों ने भी घुटने टेक दिए और रेल की पटरी को 100 मीटर दक्षिण स्थापित करने का निर्णय लिया।
यह मंदिर सिद्धपीठ देवरिया जनपद मुख्यालय से 8 किमी. की दूरी पर उत्तर ग्रामसभा अहिल्वार बुजुर्ग से सटे स्थित रेलवे लाइन के उत्तर तरफ मौजूद है। वैसे तो वर्ष भर यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है किन्तु चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि के दौरान लाखों की संख्या में भक्तजन यहां अपनी मनोकामनां लेकर पहुंचते हैं।