बिजली निगम पारेषण उपकेंद्र की खाली पड़ी जमीनों का अब व्यावसायिक उपयोग होगा। पावर कारपोरेशन ने इसे लेकर गाइडलाइंस जारी कर दी है। इसके तहत सिर्फ ट्रांसमिशन उपकेंद्र की खाली जमीनों पर ही शॉपिंग कांप्लेक्स और अन्य व्यावसायिक गतिविधि हो सकेगी।
हालांकि, बिजली संगठनों ने इसका विरोध करते हुए निजीकरण की ओर बढ़ता कदम बताया है। जिले में 13 पारेषण उपकेंद्र हैं। इनमें चार सौ केवी की क्षमता का मोतीराम अड्डा, 220 केवी क्षमता का बरहुआं व गोला है। खोराबार में 220 केवी क्षमता के पारेषण उपकेंद्र का निर्माण हो रहा है।
इसके अलावा, फर्टिलाइजर में दो, मोहद्दीपुर में दो, शत्रुधनपुर, कौड़ीराम, बड़हलगंज, खजनी और पीपीगंज में 132 केवी की क्षमता के पारेषण उपकेंद्र हैं। इनमें बहुत तो अपनी क्षमता के अनुसार चल रहे हैं, जबकि बहुत की अभी क्षमता वृद्धि की जाएगी।
कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि अगर खाली जमीन पर व्यावसायिक गतिविधि की जाएगी तो उपभोक्ताओं को मिलने वाली बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। कारपोरेशन अपने इस फैसले को वापस ले।
बताया कि महानगर के ज्यादातर उपकेंद्र अपनी पूरी क्षमता से चल रहे हैं। आने वाले दिनों में मांग बढ़ेगी तो इनकी भी क्षमता बढ़ानी होगी। इस स्थिति में पारेषण उपकेंद्रों की क्षमता वृद्धि अपरिहार्य हो जाएगी। यदि जगह नहीं बचेगी तो क्षमता वृद्धि भी नहीं हो पाएगी।