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पुलिस ने किया भंडाफोड़: तीन गुना मुनाफे के लालच में दुकानदार आसानी से खपा रहे नकली गुटखा, कैंसर का खतरा बढ़ा

Wed, 17 May 2023 02:25 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. आलोक तिवारी ने कहा कि वैसे तो कोई भी गुटखा नुकसानदायक होता है, लेकिन नकली ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। क्योंकि, कंपनी के गुटखे में सुंगध, रंग के लिए जिस केमिकल का इस्तेमाल होता है, वह खाने वाला होता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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गोरखपुर में नकली गुटखे का बाजार पिछले चार सालों से तेजी से बढ़ा है। जानकर बताते हैं, तीन गुना मुनाफे के लालच में दुकानदार जानते हुए भी नकली गुटखा बेचते हैं। पांच रुपये कीमत वाले बड़ी कंपनी के गुटखे के एक पाउच पर दुकानदार को 80 पैसे बचते हैं, जबकि नकली गुटखा बेचने पर एक पाउच पर दो रुपये की बचत होती है। इसी लालच में दुकानदार भी इस खेल में शामिल हो चाते हैं। ऐसे में एक तो गुटखा, दूसरे उसके नकली होने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

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हाटा बाजार में जिस नकली फैक्टरी को पुलिस ने पकड़ा है, वह पिछले चार साल से संचालित हो रही थी। पहले यहां से आसपास के दुकानदारों को सप्लाई नहीं दी जाती थी। सूत्रों के अनुसार, इस खेल में कुछ खाकी वाले भी मिले हुए थे, इस वजह से धंधा आराम से चल रहा था। लेकिन, पिछले कुछ समय से लोकल बाजार में भी गुटखे की सप्लाई की जाने लगी थी।

स्थानीय बाजारों और बाहर के शहरों में गुटखा भेजने के लिए छोटे मालवाहक का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि किसी को संदेह न हो। बताया जा रहा है कि इस बार शिकायत एसओ के पास पहुंची तो उन्होंने अफसरों को पूरे प्रकरण की जानकारी देकर आधी रात के बाद छापा मारकर पूरे खेल को खोल दिया।
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गगहा, गजपुर, कौड़ीराम, हाटा, बड़हलगंज में होती है सप्लाई

बताया जा रहा है कि फैक्टरी में बने कमला पसंद ब्रांड के नकली गुटखे की सप्लाई गगहा, गजपुर, कौड़ीराम, हाटा, बड़हलगंज इलाके में की जाती है। क्षेत्र के कुछ दुकानदारों की मानें तो संबंधित संचालक से गुटका खरीदने पर उन्हें तीन गुना मुनाफा मिलता है। असली के मुकाबले सस्ता देने की वजह से दुकानदार भी यह माल खूब खपाते हैं। हालांकि, अब फैक्टरी पकड़े जाने के बाद दुकानदारों का कहना है कि उन्हें नहीं पता था की गुटखा नकली है।

ऐसे पहचानें नकली गुटखा
  • रैपर का रंग हल्का होता है।
  • गुटखा खाने पर स्वाद अलग होगा और मुंह में किरकिराहट होती है।
  • पैकिंग का कागज हल्का होता है।
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एक्सपर्ट कमेंट
वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. आलोक तिवारी ने कहा कि वैसे तो कोई भी गुटखा नुकसानदायक होता है, लेकिन नकली ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। क्योंकि, कंपनी के गुटखे में सुंगध, रंग के लिए जिस केमिकल का इस्तेमाल होता है, वह खाने वाला होता है। इसमें सुपारी में मौजूद टॉक्सिन कैंसर का कारक होता है। वहीं, नकली गुटखे में सुपारी, केमिकल सब घटिया क्वालिटी के होते है, जो हर तरह से नुकसादायक हैं।



 
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