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गोरखपुर में बोले शंकराचार्य निश्चलानंद: मैंने हस्ताक्षर कर दिया होता तो अयोध्या में बन गई होती मस्जिद

Sat, 30 Oct 2021 04:04 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

उन्होंने कहा कि अयोध्या में मंदिर के अगल-बगल और आमने-सामने मस्जिद बनाने की योजना थी। इसके लिए समझौता किया जा रहा था। मैंने हस्ताक्षर नहीं किए इस कारण योजना परवान नहीं चढ़ सकी। 
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शंकराचार्य जगतगुरु स्वामी निश्चलानंद सरस्वती - फोटो : अमर उजाला।
गोवर्धन पीठ पुरी के शंकराचार्य जगतगुरु स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने दावा किया है कि यदि मैंने रामालय ट्रस्ट में हस्ताक्षर कर दिया होता तो अयोध्या में मस्जिद बन गई होती। इस बारे में पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव जीवित होते तो बताते। उन्होंने कहा कि अयोध्या में मस्जिद बनने की योजना थी, लेकिन मेरे हस्ताक्षर नहीं करने से निरस्त हो गई।  

शंकराचार्य दो दिनों के गोरखपुर प्रवास के दौरान शुक्रवार देर शाम गीता वाटिका में आयोजित धर्मसभा में भक्तों के प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे। उन्होंने कहा कि आज नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ श्रीराम का मंदिर बनाने का श्रेय प्राप्त कर रहे हैं, यह प्रसन्नता की बात है, लेकिन श्रीराम जन्मभूमि के लिए इनकी कोई भूमिका नहीं रही है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में मंदिर के अगल-बगल और आमने-सामने मस्जिद बनाने की योजना थी। इसके लिए समझौता किया जा रहा था। मैंने हस्ताक्षर नहीं किए इस कारण योजना परवान नहीं चढ़ सकी। 
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शंकराचार्य जगतगुरु स्वामी निश्चलानंद सरस्वती - फोटो : अमर उजाला।
सिद्धों की भूमि है गोरखपुर
शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने गीता वाटिका में कहा कि भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार मनीषी थे। हमें उनका दर्शन बहुत पहले ऋषिकेश में हुआ था। वे बहुत विनम्र थे। उन्होंने और जय दयाल गोयनका ने मिलकर गीता प्रेस के माध्यम से जिस साहित्य का प्रकाशन किया, विश्व में इतना उत्कृष्ट साहित्य मिलना कठिन है। शंकराचार्य ने कहा कि गोरखपुर सिद्धों की भूमि रही है। गीता प्रेस की स्थापना से सोने में सुगंध गोरखपुर को प्राप्त हुआ और इसकी कीर्ति में चार चांद पोद्दारजी ने लगाया। शंकराचार्य का स्वागत हनुमान प्रसाद पोद्दार स्मारक समिति के सचिव उमेश कुमार सिंहानिया व संयुक्त सचिव रसेन्दु फोगला ने किया।
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शंकराचार्य जगतगुरु स्वामी निश्चलानंद सरस्वती - फोटो : अमर उजाला।
‘सनातन संस्कृति के कण-कण में हैं भगवान’
शंकराचार्य स्वामी निश्लानंद सरस्वती ने कहा कि सनातन संस्कृति में जड़, जीव, चेतन यहां तक कि कण-कण में भगवान हैं। देव आराधना से जागृत भाव द्वारा सर्वे भवंतु सुखिन: सर्वे:सन्तु निरामया: की सीख से सबके कल्याण का भाव जागरण होता है। राष्ट्र के कल्याण में स्वयं का कल्याण है।

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शंकराचार्य जगतगुरु स्वामी निश्चलानंद सरस्वती - फोटो : अमर उजाला।
जगतगुरु शंकराचार्य शुक्रवार को बुद्ध विहार पार्ट ए स्थित अपने प्रवास स्थल पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। श्रद्धालुओं के सवालों को जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि लोक कल्याण और आत्म कल्याण में भेद नहीं है। लोक कल्याण के लिए अगर कोई अग्रसर होता है तो वह आत्म कल्याण ही है। गीता के पांचवें और 12वें अध्याय में इसका जिक्र है। इससे पहले शंकराचार्य ने काफी संख्या में भक्तजनों को दीक्षा दी। संगोष्ठी में सभी श्रद्धालुओं ने चरण पादुका पर शीश नवाया। सवाल पूछने वालों में प्रमुख रूप से ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र उपाध्याय, अजीत शाही, बृजेश त्रिपाठी, रमेंद्र प्रताप चंद, बलिराम त्रिपाठी, मानसी सिंह, मनोज सिंह शामिल रहे।
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गोरखपुर में शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज - फोटो : अमर उजाला।
इस अवसर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष राजा त्रिपाठी, सचिव राजेश सिंह, मानवेंद्र सिंह, राजेश मिश्रा, अरविंद सिंह, अजय पांडेय, जय शंकर पाल, अशोक कुमार मिश्र, संजय सिंह, डॉ. एके पांडेय, डॉ. वाई सिंह, कौस्तुभ मणि त्रिपाठी, विश्वजिताशु सिंह आशु, बृजेश मणि मिश्र, आलोक सिंह विशेन, धीरेंद्र शुक्ल, मनोज सिंह, विनोद शुक्ल, शैलेंद्र सिंह, राघवेंद्र सिंह मुन्ना आदि मौजूद रहे।
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