गोरखपुर। आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने और भ्रष्टाचार के आरोप में नामजद देवरिया की तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव की जमानत अर्जी खारिज हो गई। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अभिषेक चतुर्वेदी की अदालत ने मामले में आरोपों को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए आरोपित को राहत देने से इन्कार कर दिया।
विशेष लोक अभियोजक घनश्याम त्रिपाठी ने अदालत को बताया कि वादिनी गुड़िया सिंह के पति की नियुक्ति एक जुलाई 2016 को कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन देवरिया में सहायक अध्यापक के पद पर हुई थी। यह नियुक्ति तत्कालीन बेसिक शिक्षाधिकारी की संस्तुति पर हुई थी। वर्ष 2023 में उनके पति समेत तीन शिक्षकों की नियुक्ति निरस्त कर दी गई थी।
अभियोजन के अनुसार, नियुक्ति निरस्तीकरण के आदेश के खिलाफ शिक्षकों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। 13 फरवरी 2025 को हाईकोर्ट ने नियुक्ति निरस्तीकरण आदेश को रद्द करते हुए विभाग को नियमानुसार नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया था। आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन के दौरान तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव ने वादिनी के पति और दो अन्य शिक्षकों से 16 लाख रुपये रिश्वत की मांग की।