शासन तक पहुंचा मामला
मामला शासन तक पहुंचा तो सहकारिता के चार अफसरों से जांच कराई गई। इन अफसरों ने 239 की जगह 38 क्रय केंद्रों के धान खरीद व मिलरों को भेजे गए स्टॉक का मिलान किया तो घोटाला सामने आ गया। पता चला कि गोरखपुर के अलग-अलग मिलरों ने तैयार किया गया 34,451.49 कुंतल चावल वापस नहीं किया। इससे सरकार को बड़ा नुकसान हुआ है।
अफसरों ने अलग-अलग मिलरों की जिम्मेदारी तय करते हुए रिपोर्ट पीसीएफ को भेजी है, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। रिपोर्ट दबा दी गई। इसी का नतीजा है कि पीसीएफ के तत्कालीन जिला प्रबंधक शैलेश कुमार के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। जब घोटाला उजागर हुआ तो उन्हें मुख्यालय से संबद्ध करके खानापूर्ति कर दी गई।
वह अब भी काम कर रहे हैं। आरटीआई के जरिए मिली जांच रिपोर्ट के मुताबिक 38 क्रय केंद्रों की जांच हुई थी, लेकिन 28 क्रय केंद्रों के रजिस्टर पर प्रभारी के हस्ताक्षर नहीं थे। 10 केंद्रों के स्टॉक रजिस्टर पर ही प्रभारी के हस्ताक्षर मिले थे। यह भी बड़ी गड़बड़ी की तरफ इशारा करता है।
गोरखपुर के सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता सुनील कुमार गुप्ता ने कहा कि जिन मिलरों ने चावल नहीं दिया है, उन सबके खिलाफ आरसी जारी की गई है। तहसील स्तर से वसूली होनी है। सबसे बड़े बकाएदार मेसर्स स्वास्तिक एग्रो इंडिया गीडा की जमीन कुर्क कर दी गई है। जल्द नीलामी कराई जाएगी। तत्कालीन जिला प्रबंधक शैलेश कुमार को पीसीएफ मुख्यालय से संबद्ध किया गया था। कुछ रिकवरी भी हुई है।