गोरखपुर। प्राणायाम हमारी जीवनी शक्ति का मूल आधार है। प्राण शरीर की सभी इंद्रियों का स्वामी है। जब प्राणवायु को सही दिशा दी जाती है तो सभी इंद्रियां भी संतुलित रूप से कार्य करती हैं। इससे व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है।
ये बातें गोरखनाथ मंदिर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में महायोगी गुरु गोरखनाथ योग संस्थान, गोरखनाथ मंदिर एवं महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद् की आयोजित साप्ताहिक योग शिविर एवं शैक्षिक कार्यशाला के दूसरे दिन मंगलवार को मुख्य वक्ता दीपांजन योग संस्थान के योगाचार्य डॉ. प्रमोद कुमार ने कहीं।
महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में ‘प्राणायाम’ विषय पर संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि श्वास-प्रश्वास के लिए मिली नासिका के दोनों छिद्र केवल शारीरिक संरचना नहीं, बल्कि सूर्य और चंद्र ऊर्जा के प्रतीक हैं। दाहिना छिद्र सूर्य नाड़ी तथा बायां छिद्र चंद्र नाड़ी का प्रतिनिधित्व करता है। इन दोनों नाड़ियों का संतुलन ही महायोगी गुरु गोरखनाथ की ओर से प्रतिपादित हठयोग का सार है। सहवक्ता एवं गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ के प्राचार्य डॉ. अरविंद चतुर्वेदी ने कहा कि प्राणायाम भारतीय जीवन-पद्धति का अभिन्न अंग है। हमारे पूर्वजों ने संध्या-वंदन, नित्य कर्म और धार्मिक अनुष्ठानों में प्राणायाम को प्रथम स्थान दिया है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ अतुल कुमार तिवारी के वैदिक मंगलाचरण से हुआ। संचालन एवं विषय की प्रास्ताविकी संस्कृत विद्यापीठ के आचार्य दीपनारायण ने प्रस्तुत की। अंत में महायोगी गुरु गोरखनाथ योग संस्थान के योग प्रशिक्षक नवनीत चौधरी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर आचार्य डॉ. रोहित मिश्र, डॉ. दिग्विजय शुक्ल, बृजेश मणि मिश्र, डॉ. प्रांगेश मिश्र, पुरुषोत्तम चौबे, शशिकुमार, योग प्रशिक्षक कमलेश मौर्य, रवि सिंह, नित्यानंद तिवारी समेत बड़ी संख्या में प्रशिक्षु एवं योग साधक उपस्थित रहे।
सुबह योगाभ्यास और ध्यान का भी हुआ प्रशिक्षण
साप्ताहिक योग शिविर के अंतर्गत सुबह छह बजे से 7:30 बजे तक प्रशिक्षुओं को योगाभ्यास एवं ध्यान की विभिन्न क्रियाओं का प्रशिक्षण दिया गया। योग प्रशिक्षक नवनीत चौधरी और कमलेश मौर्य के निर्देशन में प्रतिभागियों ने योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास कर स्वस्थ जीवन के गुर सीखे।