- निशाने पर व्यापारी, रिटायर्ड और सरकारी कर्मचारी
- ट्रेडिंग, डिजिटल अरेस्ट और इंवेस्टमेंट के नाम पर कर रहे जालसाजी
- कोतवाली इलाके में युवक से 17 लाख और गोरखनाथ में रिटायर्ड शिक्षक से 14 लाख रुपये की हुई थी ठगी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। जालसाजी के लिए साइबर अपराधी नए-नए तरीके निकाल रहे हैं। आजकल सबसे ज्यादा ट्रेडिंग और इंवेस्टमेंट के नाम पर जालसाजी के मामले सामने आ रहे हैं। साइबर अपराधियों का निशाना व्यापारी, रिटायर्ड लोग और सरकारी कर्मचारी हैं।
हर रोज साइबर अपराध से जुड़े मामले सामने आ रहे हैं। इन सभी में जालसाज साइबर अपराध के कई तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनसे अधिकतर लोग अनजान हैं। ठगी को अंजाम देने वाले मामलों में देखा गया है कि अपराधी उन तरीकों का इस्तेमाल करते हैं जो केवल टेक्नोलॉजी से जुड़ा व्यक्ति ही समझ सकता है।
जानकारी के मुताबिक, जालसाज सबसे ज्यादा खुद को बैंक कर्मी या किसी कंपनी का अधिकृत कर्मचारी बताकर फोन पर गोपनीय जानकारी हासिल करते हैं। यही नहीं जालसाज सोशल मीडिया की मदद से लोगों की पूरी डिटेल हासिल कर लेते हैं, जिससे जालसाज के चंगुल में आसानी से लोग फंसकर रकम गंवा देते हैं।
केस 1
अगस्त में गोरखनाथ थाना क्षेत्र के रिटायर्ड शिक्षक को डिजिटल अरेस्ट कर 14 लाख रुपये की जालसाजी हुई थी। मामले में साइबर पुलिस ने जांच करते हुए पीड़ित के 13.87 लाख रुपये वापस करवा दिए। जालसाजों ने एनआईए का अधिकारी बताकर कॉल की थी।
केस 2
ट्रेडिंग के नाम पर 39 लाख की जालसाजी
ट्रेडिंग के जाल में फंसाकर अधिक मुनाफे का लालच देकर जालसाज ने 39 लाख रुपये की जालसाजी की। गोरखनाथ क्षेत्र के राजेंद्रनगर निवासी आनंद श्रीवास्तव की तहरीर पर साइबर थाने में मंगलवार को केस दर्ज किया। आनंद श्रीवास्तव ने तहरीर देकर बताया था कि व्हाट्सएप के माध्यम से शार्दुल जैन नाम के व्यक्ति ने संपर्क किया। उसने लालच दिया कि एप से अगर ट्रेडिंग किए तो प्रतिदिन 500-1400 प्रतिशत तक फायदा होगा। उसके कहने पर एबंस प्रो एप डाउनलोड किया। इसके बाद 29 जनवरी से 12 फरवरी 2025 तक 44 लाख रुपये उसके दिए खाते में जमा किए। काम पड़ने पर इसमें से पांच लाख रुपये निकाले। इसके बाद और रुपये निकालने के लिए 13 लाख रुपये जमा करने के लिए कहा गया। तब जालसाजी का अहसास हुआ।
केस 3
युवक से की थी 16 लाख की ठगी
ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश में भारी मुनाफे का लालच देकर साइबर ठगों ने एक युवक से करीब 16 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर ली थी। पीड़ित की शिकायत पर कोतवाली थाने में नौ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर गई थी। पीड़ित अमन पांडेय ने बताया कि उन्हें व्हाट्सएप पर “93 डीबीएस एनेलिस्ट फोरम” नामक एक ग्रुप में जोड़ा गया। इस ग्रुप में रोजाना ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट से जुड़े टिप्स दिए जाते थे।
साइबर ठगी से बचने के उपाय
साइबर एक्सपर्ट उपेंद्र सिंह ने बताया कि यदि किसी अनजान नंबर से काॅल आती है और वह आपको किसी बैंक खाता, मनी लाॅन्ड्रिंग या किसी अन्य अपराध में फंसा होने का दावा करता है तो घबराएं नहीं। पहले तत्काल कॉल कट कर दें। अपने आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण, पासवर्ड या अन्य संवेदनशील जानकारी कभी भी फोन, ईमेल या संदेश के माध्यम से न दें। बैंक या सरकारी एजेंसी कभी फोन पर इन चीजों की मांग नहीं करतीं। यदि कोई दावा करता है कि आपके खिलाफ कोई वारंट जारी किया गया है या आपको किसी अपराध में फंसा लिया गया है तो तुरंत स्थानीय पुलिस या संबंधित विभाग से सत्यापन करें। यदि आपको लगता है कि आप धोखाधड़ी के शिकार हो चुके हैं तो तुरंत साइबर थाने में रिपोर्ट करें और अपने बैंक से संपर्क करें। साथ ही अगर किसी ने खाते में रुपये ट्रांसफर किए हैं तो तुरंत बैंक को सूचित करें। फिशिंग स्कैम में साइबर अपराधी आपको आकर्षक ऑफर या धमकी भरे संदेश भेजते हैं। ऐसे संदेशों पर क्लिक न करें और संदिग्ध लिंक से दूर रहें।
साइबर फिशिंग से बढ़ रहा खतरा
साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए साइबर फिशिंग का सहारा ले रहे हैं। इसमें ईमेल, मैसेज और फर्जी लिंक के माध्यम से बैंक, केवाईसी अपडेट या इनाम का झांसा देकर व्यक्तिगत जानकारी हासिल जालसाज कर लेते हैं। जैसे ही लोग लिंक पर क्लिक कर अपनी डिटेल भरते हैं, उनका बैंक खाता या डिजिटल वॉलेट खाली हो जाता है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि अनजान लिंक पर क्लिक न करें और ओटीपी, पासवर्ड किसी से साझा न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत साइबर सेल में शिकायत करें।