श्रावण मास की शिवरात्रि छह अगस्त शुक्रवार को मनाई जाएगी। हिंदू पंचाग में हर साल में 12 शिवरात्रि होती हैं, लेकिन इनमें से दो शिवरात्रि को खास महत्व दिया जाता है। इनमें सबसे प्रमुख फाल्गुल मास की शिवरात्रि मानी जाती है, जिसे महाशिवरात्रि भी कहते हैं। वहीं इसके अतिरिक्त दूसरी महत्वपूर्ण शिवरात्रि सावन की मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत रख पूजन-अर्चन करने वाले भक्तों पर महादेव जल्दी प्रसन्न होते हैं और उन्हें उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है।
मासिक शिवरात्रि का महत्व
पंडित अवधेश मिश्रा के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि मासिक शिवरात्रि व्रत रखने और भगवान शिव की सच्चे मन से पूजन-अर्चन करने वाले भक्तों की सभी मनोमनाएं पूरी होती हैं। इस दिन व्रत करने से हर मुश्किल कार्य आसान हो जाते हैं और व्रती की सारी समस्याएं दूर होती हैं। जो कन्याएं मनोवांछित वर पाना चाहती हैं, इस व्रत को करने के बाद उन्हें उनकी इच्छा अनुसार वर मिलता है। विवाह में आ रही रुकावटें भी दूर होती हैं। साथ ही इस व्रत को रखने वाले उपासकों को अपनी इंद्रियों को नियंत्रण रखने में मदद मिलती है। क्रोध, ईर्ष्या, अभिमान और लालच जैसी भावनाएं उसके अंदर प्रवेश नहीं कर पाती हैं।
मासिक शिवरात्रि पूजन विधि
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि कर लें और फिर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर में या किसी मंदिर में जाकर भगवान शिव के साथ उनके परिवार की पूजा करें। शिवलिंग का रुद्राभिषेक जल, घी, दूध, शक्कर, शहद, दही आदि से करें। शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और श्रीफल चढ़ाएं। भगवान शिव की धूप, दीप, फल और फूल आदि से पूजा करें। शिव पूजा करते समय आप शिव पुराण, शिव स्तुति, शिव अष्टक, शिव चालीसा और शिव श्लोक का पाठ करें। शाम के समय फलाहार ग्रहण करें। रात्रि जागरण कर शिव परिवार परिवार की उपासना करें। अगले दिन भगवान शिव की पूजा करें और ब्राह्मण को भोजन करा कर दान करें फिर व्रत का पारण करें।