देवरिया जिले में सिल्ट की सफाई न होने से लोगों की आस्था का केंद्र सरयू नदी घाटों से करीब 500 मीटर दूर से बहने लगी है। इससे बुजुर्गों और महिलाओं को दिक्कत उठानी पड़ रही है। जो लोग नदी किनारे धार्मिक अनुष्ठान के लिए जाते हैं उन्हें रेत में लंबा सफर तय करना पड़ रहा है। आश्चर्य तो यह है कि जिम्मेदार भी इस समस्या से वाकिफ हैं, लेकिन उनका ध्यान न देना यह दर्शाता है कि उन्हें लोगों की दिक्कतों से कोई सरोकार नहीं।
सरयू नदी के किनारे सैकड़ों लोग आए दिन मांगलिक कार्यों और कर्मकांड आदि के लिए एकत्र होते हैं। उनकी सहूलियत के लिए नगर पालिका ने बरहना, सीता, परशुराम सहित 12 घाट बनवाए हैं। पूर्व में नदी जब पक्के घाटों से होकर बहती थी तो लोगों को पूजा-पाठ, स्नान आदि में दिक्कत नहीं उठानी पड़ती थी। लेकिन करीब चार सालों से जगह-जगह सिल्ट जमा होने के कारण नदी 500 मीटर दूर से बहने लगी है। बरसात के मौसम में पानी बढ़ने से नदी का रुख घाटों की ओर हो जाता है, लेकिन बाद के मौसम में यह फिर दूर चली जाती है।
क्षेत्र के निवासी जगत नारायन तिवारी, पवन, जगदीश आदि का कहना है कि मोहन सेतु के निकट अगर सिल्ट की सफाई करा दी जाए तो नदी पूर्व की तरह प्रवाहित होने लगेगी। उन्होंने बड़े-बुजुर्गों के हवाले से बताया कि ब्रितानी हुकूमत में कभी इस जलमार्ग से शीरा का व्यापार होता था, लेकिन अब तो नदी ही धारा बदलने लगी है। ऐसे में स्नान पर्वों पर सरयू तट पर लगने वाले मेले के दौरान भी लोगों को परेशानी उठानी पड़ेगी।