गिरोह का सरगना वसील खान अपने साथी एजेंट केशर देव की मदद से खजांची व अन्य जगहों पर काम की तलाश में आने वाले मजदूरों को निशाना बनाते थे। जिन मजदूरों को कई दिनों से काम नहीं मिलता था, उसे ही टारगेट करते थे और फिर रुपयों का लालच देकर खून देने के लिए राजी करा लेते थे। खून को बेचने में इनकी मदद बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कुछ सफाई कर्मचारी करते थे।
सफाई के दौरान ये कर्मचारी उन मरीजों के तीमारदारों की जानकारी जुटाते थे, जो खून के लिए परेशान हों। फिर उन्हें वसील खान का नंबर दे देते थे। कहते थे कि वसील आसानी से खून दिलवा देगा। परेशान तीमारदार, वसील के नंबर पर संपर्क करते थे, इसके बाद मजदूर को लाया जाता था।
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उससे खून लेकर उसके बदले जिस ग्रुप के खून की जरूरत होती थी, उसे दिला देते थे। मजदूर को तय करने के लिए छह हजार प्रति यूनिट खून डोनेट करने का प्रलोभन दिया जाता था। जरूरतमंद से जितने पर सौदा तय हो जाए, उसी हिसाब से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को भी कमीशन दिया जाता था। कई जरूरतमंदों से इन लोगों ने 25 हजार रुपये तक वसूले थे।
खून माफिया के इस नेटवर्क में कौन- कौन शामिल है, पुलिस जांच में जुट गई है। पुलिस के मुताबिक, मेडिकल काॅलेज के कुछ वार्ड बॉय की भूमिका भी संदिग्ध मिली है। पुलिस यह जानकारी भी जुटा रही है कि कितने लोगों को इस गिरोह ने शिकार बनाया है। पिछले एक महीने में इस माफिया से खून लेने वाले मरीजों के तीमारदारों को भी बुलाकर बयान लिया जाएगा।
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खून की हो जरूरत तो यहां पर करें संपर्क, पुलिस से भी ले सकते हैं मदद
खून की जरूरत होने और डोनर न होने की दशा में ऑनलाइन डोनर की तलाश की जा सकती है। इसके लिए जिलास्तर की वेबसाइट
bbdhgorakhpur.com पर जाकर डोनर खोज सकते हैं। इसके अलावा प्रदेश स्तर पर भी एक वेबसाइट है।
इन दोनों ही वेबसाइट पर डोनर के नाम के साथ ही नंबर है, जो स्वैच्छिक रक्तदाता हैं और शहर में रहने पर खून दे सकते हैं। एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने बताया कि पुलिस विभाग में भी रक्तदाताओं का एक ग्रुप है। अगर किसी को खून की जरूरत है तो सिपाही राजन को 8924091231 पर काॅल करें। वे निशुल्क रक्तदान कराएंगे।