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माता के इस दरबार से कोई भक्त नहीं जाता है खाली, 151 किलो चांदी से बना है इनका सिंहासन

Wed, 10 Jun 2020 03:15 PM IST
vivek shukla शोभित कुमार पांडेय, संतकबीरनगर।
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samay maharani temple - फोटो : अमर उजाला।
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संतकबीरनगर जिले के खलीलाबाद में स्थित समय माता का मंदिर लोगों के लिए आस्था और श्रद्धा का केंद्र हैं। देवी के मंदिर में पहुंचकर श्रद्धालुओं की मांगी गई सभी मुरादें पूरी होती हैं। प्राचीन काल का यह मंदिर अब भव्य रूप में लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

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मंदिर की प्राचीनता को लेकर अनेक मत हैं। मान्यता के अनुसार देवी की प्रतिमा दूध की धार के साथ सिद्धार्थनगर जिले के बढ़नी क्षेत्र से लाई जा रही थी। जिसे कहीं स्थापित किया जाना था, लेकिन दूध की धार यहां तक आते-आते समाप्त हो गई तो इसे अन्य स्थान पर ले जाना संभव नहीं हो सका। ऐसे में देवी मां की प्रतिमा को खलीलाबाद के मौजूदा स्थान पर स्थापित कर दिया गया।

एक अन्य मान्यता के अनुसार छह सौ साल पहले मुगल काल में खलीलुर्रहमान ने खलीलाबाद नगर को बसाया था, वे अपने किले के पास समय जी की प्रतिमा स्थापित करना चाहते थे। इस तरह माता की प्रतिमा यहां पर स्थापित कर दी गई।
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मंदिर के पुजारी भाष्कर उपाध्याय और उनके सहयोगी पुजारी सुरेश मिश्रा बताते है कि इस मंदिर को सद्भाव के प्रतीक रूप में भी देखा जाता है। साल भर यहां पूजा-पाठ, कथा, मुंडन, शादी आदि मांगलिक कार्य होते रहते हैं। सुबह-शाम होने वाली मां की आरती दर्शनीय होती है। जिले के आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं की भीड़ समय माता के दर्शन के लिए लगी रहती है। भक्तों की मुरादें पूरी होती हैं। इस दरबार से कोई खाली नहीं जाता है।

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151 किलोग्राम चांदी का बना है सिंहासन

समय जी महारानी सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष अमर नाथ रूंगटा बताते है कि 1967 में श्री समय जी महारानी धर्मशाला कमेटी के नाम से मंदिर में पूजा अर्चना होती थी। 1967 में यहां धर्मशाला बनवाया गया था। बाद में धर्मशाला कमेटी का नाम बदल कर समय जी महारानी सेवा ट्रस्ट हुआ और जनसहयोग से मंदिर को भव्य रूप दिया गया।

सर्व प्रथम समय जी महारानी की मूर्ति मिट्टी की हुआ करती थी। 1932 में जमुना पंडित के सहयोग से मथुरा से लाकर पत्थर की मूर्ति लगाई गई थी। मूर्ति पहले खुले में रखी गई थी। श्रीराम नरायण जैन ने चारों तरफ बरामदा बनवा कर मूर्ति को व्यस्थित कराया था।

वर्ष 2000 में धर्मशाला कमेटी के अध्यक्ष रामकृपाल रूंगटा ने ट्रस्ट व जनसहयोग से मंदिर का निर्माण कराया और सिंह वाहिनी, दुर्गा प्रतिमा,बजरंगबली और भैरव की मूर्ति स्थापित कराया था। 2019 में समय जी महारानी सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष अमर नाथ रूंगटा ने जनसहयोग से 151 किलोग्राम चांदी का सिंहासन बनवाया। मंदिर में जो भी आस्था से आकर दर्शन करता है, समय माता उसकी मनोकामना पूर्ण करती है।
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