काजल निषाद और यशपाल रावत।
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यशपाल व विजय बहादुर दूसरे स्थान पर थे
सपा ने जिन पुराने चेहरों पर फिर से भरोसा जताया है, उनमें से ग्रामीण से विजय बहादुर व सहजनवां से यशपाल रावत, पिछले विधानसभा चुनाव 2017 में दूसरे नंबर पर थे। यशपाल 2007 में निर्दल के तौर पर विधायक भी रह चुके हैं तो उनके पिता स्व. शारदा प्रसाद रावत तीन बार, वर्ष 1974, 1977 और 1989 में विधायक रह चुके हैं। उनकी मां स्वर्गीय प्रभा रावत भी एक बार विधायक थीं।
इसी तरह पिपराइच से दूसरी बार टिकट पाने वाले अमरेंद्र निषाद व खजनी से रुपावती 2017 के चुनाव में तीसरे नंबर पर थीं। चिल्लूपार में भी पार्टी तीसरे नंबर पर थी, मगर वर्तमान विधायक विनय शंकर तिवारी के बसपा छोड़ सपा में शामिल हो जाने से पार्टी ने उन्हें ही उम्मीदवार घोषित किया है।
कांग्रेस से आईं काजल को कैंपियरगंज से टिकट
सपा ने पिछले चुनाव में कैंपियरगंज में जिस कांग्रेस प्रत्याशी चिंता यादव को समर्थन दिया था, वह भी दूसरे पायदान पर थीं। इस बार पार्टी ने इस सीट से काजल निषाद को मैदान में उतारा है। काजल इससे पहले वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर गोरखपुर ग्रामीण से चुनाव लड़ चुकी हैं। काजल सोशल मीडिया पर भी बहुत सक्रिय हैं। इस चुनाव में 9.38 फीसदी वोट पाकर, वह चौथे स्थान पर थीं। तब भाजपा के टिकट पर 31.31 फीसदी वोट पाकर विजय बहादुर यादव चुनाव जीत विधायक बने थे।
दूसरे नंबर पर 22.27 फीसदी वोट पाकर सपा के जफर अमीन डक्कू और 21.99 फीसदी वोट पाकर बसपा के राम भुआल निषाद, तीसरे पायदान पर थे। वहीं बांसगांव से प्रत्याशी घोषित किए गए, डॉ. संजय कुमार 2014 के बांसगांव लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर किस्मत आजमा चुके हैं। हालांकि, इस चुनाव में 5.77 फीसदी वोट पाकर संजय चौथे स्थान पर रहे और 47.61 फीसदी वोट पाकर भाजपा के कमलेश पासवान सांसद चुने गए थे।
अमरेंद्र निषाद विजय बहादुर यादव डॉ संजय कुमार।
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